मुंबई: प्रदर्शन पड़ा भारी, 8 हजार शिक्षकों का एक दिन का वेतन काटेगा शिक्षा विभाग

Mumbai: Protests prove costly, Education Department to deduct one day's salary of 8,000 teachers

मुंबई: प्रदर्शन पड़ा भारी, 8 हजार शिक्षकों का एक दिन का वेतन काटेगा शिक्षा विभाग

महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग ने रविवार को स्कूल बंद विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए 8 हजार 629 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक दिन की सेलरी कांटने का फैसला किया है। यह सभी शिक्षक 9 जुलाई को राज्य सरकार के विरुद्ध स्कूल बंद विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 

मुंबई: महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग ने रविवार को स्कूल बंद विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए 8 हजार 629 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक दिन की सेलरी कांटने का फैसला किया है। यह सभी शिक्षक 9 जुलाई को राज्य सरकार के विरुद्ध स्कूल बंद विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। महाराष्ट्र के सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी के शिक्षा संचालक कार्यालय से रविवार को मिली जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन में शामिल हुए 8 हजार 629 टीचरों की एक दिन की सैलरी काटी जाएगी। 

 

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राज्य के कुछ टीचर यूनियनों ने शिक्षकों की अलग-अलग पेंडिंग मांगों को लेकर 9 जुलाई को स्कूल बंद विरोध प्रदर्शन किया था। सरकार ने विरोध प्रदर्शन से पहले ही साफ रुख अपना लिया था कि स्टूडेंट्स को पढ़ाई का कोई नुकसान न हो और रेगुलर स्कूल चलते रहें। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि किसी भी हालत में स्कूल बंद न करें और पढ़ाई की गतिविधियां रेगुलर चलती रहें। हालांकि, कुछ जिलों के स्कूलों में टीचरों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा। इसके बाद डिविजनल और जिला लेवल से जानकारी इक_ा की गई।

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इन रिपोर्ट के आधार पर पता चला है कि राज्य में कुल 8,629 टीचरों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है। इसलिए, संबंधित टीचरों की एक दिन की सैलरी काटने का फैसला किया गया है। शिक्षा विभाग ने एक बार फिर साफ किया है कि सरकारी आदेश के मुताबिक, स्टूडेंट्स की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, यह पक्का करने की जिम्मेदारी स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन और टीचरों की है। एडमिनिस्ट्रेशन ने यह भी चेतावनी दी है कि स्कूल बंद होने से स्टूडेंट्स की पढ़ाई का नुकसान हो सकता है, इसलिए ऐसे विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जाएगा। इस फैसले से टीचर संगठनों में नाराजगी की संभावना है, लेकिन खबर लिखे जाने तक संगठनों ने सरकारी निर्णय के बारे में प्रतिक्रिया नहीं दी है ।
 

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