पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने पर अमित ठाकरे का तीखा हमला
Amit Thackeray launches scathing attack on environmentalist Sonam Wangchuk's hospitalisation
सोनम वांगचुक को 21 दिनों की भूख हड़ताल के बाद गिरते स्वास्थ्य के कारण दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है। इस कार्रवाई की राजनीतिक गलियारों में कड़ी आलोचना हो रही है, जिसमें एमएनएस नेता अमित ठाकरे ने इसे "लोकतंत्र का काला दिन" बताते हुए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वांगचुक नीट परीक्षा विवाद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
मुंबई: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। वांगचुक पिछले 21 दिनों से NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।
अमित ठाकरे की कड़ी प्रतिक्रिया
अमित ठाकरे ने इस घटना को "भारतीय राजनीति के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक" करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, "एक महान शिक्षाविद, वैज्ञानिक, जिन्होंने किसानों, छात्रों और हमारी सेना के लिए काम किया है, वे 20 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर थे, और सरकार ने उनकी आवाज़ सुनने के बजाय उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराया।" उन्होंने सरकार के इस रवैये को युवाओं की चिंताओं के प्रति संवेदनहीनता का प्रमाण बताया है।
घटनाक्रम का विवरण
- अस्पताल में भर्ती: 18 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों और गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।
- विरोध और तनाव: पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच मामूली झड़प भी हुई। पुलिस ने बताया कि वांगचुक के स्वास्थ्य में गिरावट और निर्जलीकरण (dehydration) के संकेतों को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता थी।
- परिवार की अपील: वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंग्मो ने अस्पताल प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी अनुमति और पारिवारिक चिकित्सकों के परामर्श के बिना उन्हें कोई भी उपचार न दिया जाए।
- आंदोलन जारी: वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है और 20 जुलाई को संसद मार्च की अपनी योजना पर कायम रहने का संकल्प लिया है।


