नागपुर रेप का आरोपी अस्पताल के ICU में भर्ती: वकील ने लगाया कस्टोडियल टॉर्चर का आरोप, पुलिस बोली- 'जेल में खुद को पहुंचाई चोट'
Nagpur rape accused admitted to hospital ICU: Lawyer alleges custodial torture, police say he 'injured himself in jail'
नागपुर के सनसनीखेज रेप मामले का आरोपी निरमय पखारे कस्टडी के दौरान घायल होकर जीएमसीएच (GMCH) के आईसीयू में भर्ती हुआ है। आरोपी पक्ष ने कस्टोडियल टॉर्चर का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि आरोपी ने जांच से बचने और वीआईपी ट्रीटमेंट न मिलने के कारण लॉक-अप में खुद को चोट पहुंचाई है। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
नागपुर (7 अगस्त 2026): नागपुर के हुड़केश्वर इलाके में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न और बर्बरता करने के आरोपी निरमय माधव पखारे (20 वर्ष) को गंभीर हालत में नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH) के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है। आरोपी के आईसीयू में भर्ती होने के बाद यह मामला पुलिस कस्टडी टॉर्चर और पुलिस के दावों को लेकर विवादों में घिर गया है।
आरोपी के वकील का दावा: पुलिस ने की बेरहमी से पिटाई
आरोपी निरमय पखारे के वकील प्रकाश जायसवाल ने आरोप लगाया है कि पुलिस कस्टडी के दौरान उनके मुवक्किल के साथ गंभीर रूप से मारपीट और कस्टोडियल टॉर्चर किया गया है। वकील के अनुसार, आरोपी के आंखों, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोटें आई हैं और सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
पुलिस का पलटवार: 'पूछताछ से बचने और ड्रामेबाजी के लिए खुद को चोट पहुंचाई'
वहीं, हुड़केश्वर पुलिस ने कस्टोडियल टॉर्चर के आरोपों को पूरी तरह से खारिज और निराधार बताया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ठाणे के एक समृद्ध डॉक्टर परिवार से आता है और वह कस्टडी में लगातार वीआईपी सुविधाओं (जैसे एयर-कंडीशनर, पिज्जा, मच्छर-मुक्त कमरा) की मांग कर रहा था।
पुलिस का दावा है कि जब उससे मोबाइल का पासवर्ड मांगा गया और जांच में सहयोग करने को कहा गया, तो उसने देर रात हवालात (लॉक-अप) की दीवारों और फर्श पर अपना सिर और चेहरा पटककर खुद को घायल कर लिया। पुलिस के अनुसार, जांच से बचने और केस को कमजोर करने की नीयत से आरोपी यह सब ड्रामा कर रहा है।
अदालत का रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पोक्सो (POCSO) कोर्ट ने आरोपी निरमय पखारे की पुलिस कस्टडी खत्म करते हुए उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पुलिस दोबारा पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है।


