मुंबई:  जमानत रद्द होते ही शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे पहुंचे पुलिस के पास

Mumbai: Shiv Sena councilor Ramesh Mhatre approached the police after his bail was cancelled.

मुंबई:  जमानत रद्द होते ही शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे पहुंचे पुलिस के पास

महाराष्ट्र के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ कथित रूप से सरेआम मारपीट करने के मामले में आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने रविवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद उठाया। हाईकोर्ट ने आरोपी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह तय समय सीमा के भीतर पुलिस के सामने पेश हों, जिसके बाद म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया।

मुंबई : महाराष्ट्र के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ कथित रूप से सरेआम मारपीट करने के मामले में आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने रविवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद उठाया। हाईकोर्ट ने आरोपी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह तय समय सीमा के भीतर पुलिस के सामने पेश हों, जिसके बाद म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया।

 

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जानकारी के अनुसार, रमेश म्हात्रे पर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ मारपीट करने का आरोप है। इस मामले में उन्हें पहले निचली अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और जमानत रद्द कर दी। बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखद की खंडपीठ ने शनिवार को सुनवाई करते हुए रमेश म्हात्रे को रविवार शाम 5 बजे तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। अदालत के आदेश के बाद रविवार को म्हात्रे पुलिस के समक्ष पहुंचे और अपनी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी कराई।

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हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कल्याण मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले पर भी सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और उनकी प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है, खासकर तब जब आरोप गंभीर अपराधों से जुड़े हों। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही आरोपी को पहले दर्ज 17 मामलों में बरी किया जा चुका हो, लेकिन उसके खिलाफ कुल 18 आपराधिक मामले दर्ज होने की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी की पृष्ठभूमि और अपराधों की गंभीरता पर विचार करना आवश्यक है।

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हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया था। अदालत के निर्देश के अनुसार आरोपी को निर्धारित समय के भीतर पेश होना था। रविवार को रमेश म्हात्रे ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। महिला डॉक्टर के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई थी। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में बेहतर माहौल की मांग उठाई थी। फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। मामले में जांच जारी है और पुलिस आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।

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