मुंबई : खुद को भगवान शिव का अवतार बतानेवाला अशोक खरात निकला बड़ा खिलाड़ी, ईडी की दायर की चार्जशीट, जानिए क्या
Mumbai: Ashok Kharat, who claimed to be an incarnation of Lord Shiva, turned out to be a big player; ED files chargesheet; find out why.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में अशोक कुमार एकनाथ खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात तथा चार अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ईडी की यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें आरोपी पर धार्मिक आस्था का दुरुपयोग कर लोगों से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली करने और उस धन को विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने का आरोप है।
मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में अशोक कुमार एकनाथ खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात तथा चार अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ईडी की यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें आरोपी पर धार्मिक आस्था का दुरुपयोग कर लोगों से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली करने और उस धन को विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने का आरोप है।
ईडी ने बताया कि 15 जुलाई को पीएमएलए की धारा-5 के तहत अशोककुमार खरात उर्फ कैप्टन/बंधु बाबा और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद लगभग 19.20 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया।
मई में खंगाले गए थे बैंक लॉकर
इससे पहले अप्रैल और मई 2026 के दौरान आरोपी और उसके सहयोगियों से जुड़े विभिन्न परिसरों, बैंक लॉकरों और वाहनों पर की गई तलाशी के दौरान पीएमएलए की धारा-17 के तहत लगभग 17.70 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां जब्त अथवा फ्रीज की गई थीं। इन दोनों कार्रवाइयों को मिलाकर अब तक इस मामले में करीब 36.90 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं।
ईडी जांच में क्या
ईडी ने अपनी जांच महाराष्ट्र के सरकार वाडा, शिरडी, सिन्नर और राहाता पुलिस थानों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे संकेत मिला कि अशोक कुमार एकनाथ खरात ने लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था का फायदा उठाते हुए उन्हें 'अवतार पूजा' कराने, गंभीर बीमारियों का इलाज कराने, दुर्भाग्य दूर करने तथा व्यापार और जीवन में सफलता दिलाने का झांसा देकर बड़ी मात्रा में धन और संपत्तियां हासिल कीं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने लोगों को धोखे में रखकर जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी जैसे तरीकों से अवैध कमाई की, जिसे बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध बनाने का प्रयास किया गया।
दो सहकारी क्रेडिट सोसायटी बनाईं
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि अशोककुमार खरात स्वयं को भगवान शिव का अवतार और दैवीय शक्तियों से संपन्न व्यक्ति बताकर भक्तों का विश्वास जीतता था। एजेंसी का आरोप है कि अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध स्वरूप देने के लिए दो सहकारी क्रेडिट सोसायटियों का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान एक कर्मचारी की मिलीभगत से अनेक बैंक खातों का धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से संचालन किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि भारी मात्रा में नगदी जमा करने और बाद में उसे निकालने, जिसमें विभिन्न निवेशों की मैच्योरिटी से प्राप्त राशि भी शामिल थी, के लिए कई बेनामी खातों का उपयोग किया गया।


