वसई बाईपास रेल प्रोजेक्ट का काम कागजों पर आगे बढ़ा, लेकिन सर्वे में देरी के कारण अटका भूमि अधिग्रहण का काम

The Vasai Bypass Rail Project is progressing on paper, but land acquisition is stalled due to survey delays.

वसई बाईपास रेल प्रोजेक्ट का काम कागजों पर आगे बढ़ा, लेकिन सर्वे में देरी के कारण अटका भूमि अधिग्रहण का काम

वसई रोड स्टेशन पर रेल यातायात का दबाव कम करने के लिए प्रस्तावित 'वसई बाईपास रेल प्रोजेक्ट' की रफ्तार कागजों तक सीमित है। प्रशासनिक देरी और जमीनों के 'संयुक्त माप सर्वेक्षण' (JMS) के पूरा न होने के कारण भूमि अधिग्रहण का काम अटका हुआ है, जिससे परियोजना के समय और लागत दोनों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

मुंबई और पड़ोसी क्षेत्रों के रेल बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रस्तावित वसई बाईपास रेलवे परियोजना (Vasai Bypass Rail Project) की प्रगति फिलहाल केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित दिखाई दे रही है। अधिकारियों द्वारा योजना बनाने और कागजी मंजूरियों के बावजूद, जमीन के महत्वपूर्ण संयुक्त माप सर्वेक्षण (Joint Measurement Survey) में हो रही लगातार देरी की वजह से परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।

​इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वसई रोड जंक्शन पर रेल यातायात के दबाव को कम करना और कोंकण/दक्षिण की ओर जाने वाली ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों (Freight Trains) के संचालन को सुगम बनाना है। हालांकि, स्थानीय राजस्व विभाग और रेलवे अधिकारियों के बीच भूमि सर्वेक्षण के समन्वय में देरी के चलते निजी और सरकारी जमीनों के अधिग्रहण का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

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प्रमुख बिंदु:
  • ट्रैफिक जाम से मुक्ति की योजना: वसई बाईपास लाइन बनने से बांद्रा और सूरत/अहमदाबाद की तरफ से आकर वसई होकर दक्षिण भारत (पनवेल/कोंकण) जाने वाली मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को वसई स्टेशन पर इंजन बदलने (Engine Reversal) की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे वसई स्टेशन पर ट्रेनों की भीड़ कम होगी।
  • सर्वे में देरी बनी रोड़ा: भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करने के लिए जमीनों का संयुक्त माप सर्वेक्षण अनिवार्य है। राजस्व विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अड़चनों के कारण सर्वेक्षण कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।
  • प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने की आशंका: भूमि अधिग्रहण में हो रही इस देरी के कारण न केवल परियोजना की समयसीमा आगे खिसक रही है, बल्कि भविष्य में परियोजना की निर्माण लागत (Project Cost) बढ़ने की भी प्रबल संभावना है।

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