पुणे: सचिन अहीर के दल बदल पर सुषमा अंधारे का हमला, बोलीं- यह राजनीतिक बदले की रणनीति
Pune: Sushma Andhare attacks Sachin Ahir's defection, says this is a political revenge strategy.
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों दल-बदल और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना द्वारा कथित तौर पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन टाइगर 3’ की चर्चाओं के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक सचिन अहीर का एकनाथ शिंदे गुट में जाना और उन्हें विधानसभा के उपसभापति पद के लिए नामित किया जाना नया राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस घटनाक्रम पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता सुषमा अंधारे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों दल-बदल और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना द्वारा कथित तौर पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन टाइगर 3’ की चर्चाओं के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक सचिन अहीर का एकनाथ शिंदे गुट में जाना और उन्हें विधानसभा के उपसभापति पद के लिए नामित किया जाना नया राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस घटनाक्रम पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता सुषमा अंधारे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुषमा अंधारे ने कहा कि महाराष्ट्र में जो राजनीतिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, वे सामान्य दल-बदल नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विपक्ष को कमजोर करने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। सुषमा अंधारे ने कहा कि सचिन अहीर वही नेता हैं जो उन्हें शिवसेना में लेकर आए थे। उन्होंने याद दिलाया कि सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे का करीबी माना जाता था और पार्टी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। ऐसे नेता का अचानक पार्टी छोड़ देना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने सम्मान, जिम्मेदारी और पहचान दी, वही अब दूसरी पार्टी का दामन थाम रहे हैं।
पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुषमा अंधारे ने कहा कि महाराष्ट्र में जो राजनीतिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, वे सामान्य दल-बदल नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विपक्ष को कमजोर करने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। सुषमा अंधारे ने कहा कि सचिन अहीर वही नेता हैं जो उन्हें शिवसेना में लेकर आए थे। उन्होंने याद दिलाया कि सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे का करीबी माना जाता था और पार्टी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। ऐसे नेता का अचानक पार्टी छोड़ देना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने सम्मान, जिम्मेदारी और पहचान दी, वही अब दूसरी पार्टी का दामन थाम रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में अब राजनीतिक बदले की राजनीति खुलकर दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, पहले राज्य की राजनीति में इस प्रकार के घटनाक्रम कम देखने को मिलते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि नेताओं को अपने सबसे करीबी सहयोगियों पर भी भरोसा करना मुश्किल हो गया है। सुषमा अंधारे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे राज्य की जनता के मुद्दों को सुलझाने के बजाय लगातार राजनीतिक अभियानों में व्यस्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे-बड़े राजनीतिक अभियान चलाकर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, राज्य में प्रशासनिक कामकाज से ज्यादा राजनीतिक जोड़-तोड़ पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान राजनीतिक घटनाओं का उद्देश्य केवल सत्ता संतुलन बदलना नहीं बल्कि भविष्य की राजनीति को प्रभावित करना भी है। अंधारे ने दावा किया कि यह पूरा घटनाक्रम राज्य के भीतर राजनीतिक शक्ति संतुलन को नए तरीके से स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है। सुषमा अंधारे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) अपने राजनीतिक सिद्धांतों पर कायम रहेगी और पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। उधर, सचिन अहीर के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने और उन्हें विधानसभा के उपसभापति पद के लिए नामित किए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।


