उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका: सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए भरा नामांकन

Another major setback for Uddhav Thackeray: Sachin Ahir joins the Shinde faction; files nomination for the post of Legislative Council Deputy Chairman.

उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका: सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए भरा नामांकन

शिवसेना (UBT) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। वरिष्ठ नेता और MLC सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है। शिंदे गुट में शामिल होते ही उन्होंने महायुति गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। आदित्य ठाकरे ने इस दलबदल को 'ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस' करार दिया है, वहीं अहीर का जाना वर्ली में आदित्य ठाकरे के गढ़ के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शिवसेना (UBT) को एक और करारा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने मंगलवार (30 जून) को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। शिंदे गुट में शामिल होते ही महायुति गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।

​सचिन अहीर का यह अचानक पाला बदलना उद्धव ठाकरे कैंप के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक क्षति माना जा रहा है। हाल ही में छह सांसदों के उद्धव गुट छोड़ने के बाद इसे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के 'ऑपरेशन टाइगर' की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

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​मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में भरा पर्चा

​सचिन अहीर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौजूदगी में विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। इसके तुरंत बाद, अहीर ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसमें उन्होंने पार्टी के श्रमिक विंग (लेबर विंग) सहित सभी संगठनात्मक पदों को छोड़ दिया है।

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​वर्ली और आदित्य ठाकरे के गढ़ में बड़ी सेंध

​राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सचिन अहीर का जाना मुंबई की सबसे हाई-प्रोफाइल 'वर्ली विधानसभा सीट' पर उद्धव गुट को कमजोर कर सकता है। अहीर वर्ली के पूर्व विधायक और एक दिग्गज श्रमिक नेता रहे हैं। साल 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले जब वे अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए थे, तब उन्होंने वर्ली क्षेत्र में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और 2019 में आदित्य ठाकरे की चुनावी शुरुआत के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

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​आदित्य ठाकरे का पलटवार: "यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं, 'ऑपरेशन फडणवीस' है"

​इस बड़े दलबदल पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने इसके प्रभाव को कम आंकने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि वर्ली और शिवड़ी जैसे पार्टी के गढ़ों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

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​आदित्य ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा:

"यह कोई 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं है, बल्कि 'ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस' है। जो लोग राजनीति समझते हैं, वे इसे अच्छे से जानते हैं। हमने उन्हें (सचिन अहीर को) उपनेता, एमएलसी और श्रमिक संघ प्रमुख जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं। वे और क्या चाहते थे? हमने उन्हें हर मौका दिया।"

 

​उन्होंने आगे कहा कि पार्टी छोड़ कर जाने वालों से जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा नहीं डगमगाएगा और अहीर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​सचिन अहीर ने आरोपों को नकारा, कहा- "हर जाने वाले को गद्दार कहना दुर्भाग्यपूर्ण"

​पार्टी छोड़ने पर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए सचिन अहीर ने धोखेबाजी के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:

"यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब तक हम उनके साथ रहते हैं, तब तक हम बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन जैसे ही रास्ते अलग होते हैं, हमें 'गद्दार' या अयोग्य करार दे दिया जाता है। मैं इन सभी राजनीतिक आरोपों का सही मंच पर जवाब दूंगा।"

 

​अहीर ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को भी खारिज करते हुए कहा कि विधान परिषद के उपसभापति जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना उनके जैसे जमीनी कार्यकर्ता के लिए सम्मान की बात है और वे इस पद की गरिमा के साथ काम करते रहेंगे।

​📌 मुख्य बातें (Quick Highlights):

  • कौन हैं सचिन अहीर: राकांपा (NCP) के पूर्व नेता, जो 2019 में शिवसेना में आए और 2022 में उद्धव सरकार द्वारा MLC मनोनीत किए गए थे।
  • बड़ा प्रभाव: वर्ली क्षेत्र में मजबूत पकड़, जहां से आदित्य ठाकरे विधायक हैं।
  • महायुति का दांव: महायुति गठबंधन की तरफ से विधान परिषद के उपसभापति पद के उम्मीदवार बनाए गए।

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