मुंबई के 'Save Aarey' आंदोलन का दोहरा शतक: 28 जून को लगातार 200वें रविवार को जुटेगा पर्यावरण प्रेमियों का हुजूम
Mumbai's 'Save Aarey' movement hits a double century: A massive gathering of environmental enthusiasts will assemble on June 28 for the 200th consecutive Sunday.
मुंबई के पर्यावरण संरक्षण की पहचान बन चुका 'सेव आरे आंदोलन' (Save Aarey Movement) आगामी 28 जून (रविवार) को अपने लगातार 200वें संडे विरोध प्रदर्शन को पूरा करने जा रहा है। आरे आरे के जंगलों को बचाने, मेट्रो कार शेड के विरोध और इसे पूरी तरह से 'वन क्षेत्र' घोषित करने की मांग को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक पिछले कई वर्षों से हर रविवार को पिकनिक पॉइंट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुंबई: मुंबई की 'फेफड़े' कहे जाने वाले आरे के जंगलों (Aarey Forest) को बचाने के लिए शुरू हुआ जन आंदोलन इतिहास रचने जा रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं, छात्रों और मुंबई के जागरूक नागरिकों के नेतृत्व में चल रहा 'सेव आरे आंदोलन' (Save Aarey Movement) आगामी 28 जून 2026 को लगातार 200वें रविवार (200th Consecutive Sunday) का विरोध प्रदर्शन पूरा करने जा रहा है।
अपनी प्राकृतिक विरासत और वन्यजीवों के आवास को कंक्रीट के जंगल में तब्दील होने से बचाने के लिए मुंबईकरों का यह दृढ़ संकल्प देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले शांतिपूर्ण पर्यावरण आंदोलनों में से एक बन गया है।
हर रविवार जुटते हैं लोग, क्या हैं मुख्य मांगें?
आरे के पिकनिक पॉइंट पर हर रविवार की सुबह होने वाले इस प्रदर्शन में बच्चे, बुजुर्ग, आदिवासी और विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल होते हैं। इस आंदोलन के जरिए पर्यावरण प्रेमी लगातार निम्नलिखित मांगें उठा रहे हैं:
- कार शेड का स्थायी समाधान: आरे के भीतर मेट्रो-3 कार शेड के निर्माण का पूरी तरह से विरोध और आरे की संवेदनशील जैव विविधता (Biodiversity) की रक्षा।
- पूर्ण वन क्षेत्र का दर्जा: आरे की पूरी भूमि (लगभग 3000 एकड़) को आधिकारिक रूप से आरक्षित वन (Reserved Forest) घोषित किया जाए।
- आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा: आरे के भीतर सदियों से रह रहे स्थानीय आदिवासी पाडों (गांवों) को उनके प्राकृतिक अधिकारों से बेदखल न किया जाए।
200वें रविवार को लेकर विशेष तैयारी
200वें संडे प्रोटेस्ट को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए पर्यावरण संगठनों ने व्यापक तैयारियां की हैं। 28 जून को होने वाले इस विशेष प्रदर्शन में केवल नारेबाजी नहीं होगी, बल्कि आरे की जैव विविधता पर आधारित चित्रकला (Painting), नुक्कड़ नाटक, संगीत प्रस्तुतियां और मानव श्रृंखला (Human Chain) का भी आयोजन किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी 'Save Aarey' हैशटैग के साथ इस अभियान को और तेज किया जा रहा है।
प्रकृति बनाम विकास की लड़ाई
आरे का मुद्दा पिछले कई वर्षों से मुंबई की राजनीति और अदालतों में चर्चा का विषय रहा है। एक तरफ जहां सरकारें बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) के लिए मेट्रो कार शेड को जरूरी बताती रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मुंबईकरों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और बाढ़ जैसी आपदाओं से बचने के लिए संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे इस घने जंगल को बचाना बेहद जरूरी है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि 200 हफ्तों का यह सफर केवल एक विरोध नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य को सुरक्षित रखने की एक साझा लड़ाई है।


