'कुंभ मेला सामाजिक एकता का सबसे बड़ा मंच', नासिक बैठक में RSS ने की जनभागीदारी की अपील
'Kumbh Mela is the biggest platform for social unity', RSS appeals for public participation in Nashik meeting
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नासिक में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कुंभ मेले को सामाजिक समरसता और एकता का एक बड़ा मंच बताया है। संघ के नेताओं ने आगामी कुंभ मेले की तैयारियों पर चर्चा करते हुए आम जनता और सामाजिक संगठनों से इस महाआयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और सेवा कार्यों से जुड़ने की अपील की है।
नासिक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कुंभ मेले को केवल एक धार्मिक आयोजन न मानते हुए इसे 'सामाजिक समरसता' और 'राष्ट्रीय एकता' का एक विशाल मंच करार दिया है। नासिक में आयोजित एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक के दौरान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने आगामी कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की और समाज के सभी वर्गों से इस भव्य आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।
भेदभाव मिटाने और एकता का प्रतीक है कुंभ
बैठक को संबोधित करते हुए आरएसएस नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कुंभ मेला सदियों से भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा अनूठा और पवित्र आयोजन है जहां जाति, पंथ, भाषा, ऊंच-नीच और क्षेत्र के सभी भेदभाव स्वतः ही मिट जाते हैं। पूरे देश से हिंदू समाज एक साथ आकर अपनी अगाध आस्था प्रकट करता है। संघ का मानना है कि कुंभ जैसे आयोजन समाज में भाईचारा और वैचारिक एकता को मजबूत करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
जनभागीदारी और सेवा कार्यों पर विशेष जोर
आरएसएस ने अपने स्वयंसेवकों, आम जनता और विभिन्न गैर-सरकारी व सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे आगामी कुंभ मेले में केवल एक दर्शनार्थी के रूप में न आएं, बल्कि एक 'सेवक' की भूमिका निभाएं। बैठक में निर्देश दिए गए कि श्रद्धालुओं की सहायता, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता अभियान, चिकित्सा शिविर और पर्यावरण संरक्षण जैसे बुनियादी सेवा कार्यों के माध्यम से इस आयोजन को और भी अधिक सफल और अनुशासित बनाया जा सकता है।
आगामी महाआयोजन की रूपरेखा
नासिक में होने वाले आगामी कुंभ मेले के सुचारू संचालन और प्रबंधन के लिए संघ और अन्य सहयोगी संगठनों ने अभी से अपनी कमर कस ली है। इस समन्वय बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों, साधु-संतों और प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु बनाना था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कुंभ मेला अपने मूल उद्देश्य— 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' और 'सामाजिक समरसता' के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचा सके।


