कुर्ला बेस्ट डिपो में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, इलेक्ट्रिक बसों में लगातार आ रही तकनीकी खामियों का खुलासा

Lack of basic amenities at Kurla BEST depot reveals persistent technical glitches in electric buses

कुर्ला बेस्ट डिपो में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, इलेक्ट्रिक बसों में लगातार आ रही तकनीकी खामियों का खुलासा

मुंबई के कुर्ला बेस्ट (BEST) डिपो में समिति के हालिया निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी और इलेक्ट्रिक बसों में लगातार आने वाली तकनीकी खराबियों का बड़ा खुलासा हुआ है। खराब रखरखाव, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्राइवरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में बसें डिपो में ही खड़ी रहती हैं, जिससे शहर की परिवहन सेवा प्रभावित हो रही है।

मुंबई: बेस्ट (BEST) समिति के सदस्यों द्वारा कुर्ला बेस्ट डिपो में किए गए एक निरीक्षण के दौरान गंभीर परिचालन और ढांचागत खामियां सामने आई हैं। समिति के सदस्य संतोष मेढेकर, संजय वाकोड़े और अजय सिंह की टीम ने डिपो का दौरा कर ड्राइवरों और कंडक्टरों से बातचीत की। इस दौरान कर्मचारियों ने बुनियादी सुविधाओं की दयनीय स्थिति और इलेक्ट्रिक बसों में बार-बार आ रही तकनीकी खराबियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसके बाद तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे कर्मचारी

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निरीक्षण के दौरान, डिपो कर्मचारियों ने विश्राम कक्ष (रेस्ट रूम), कैंटीन सेवा और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों ने बताया कि ये समस्याएं काफी लंबे समय से लंबित हैं और इसका सीधा असर उनके काम करने की स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

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बसों में खराबी और रखरखाव की कमी

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जांच में यह बात सामने आई कि कई ओलेक्ट्रा (Olectra) इलेक्ट्रिक बसें पिछले कई महीनों से 'एयर प्रेशर लीक' की समस्या से जूझ रही हैं। कर्मचारियों के अनुसार बस नंबर 1024, 8611, 8545, 8605 समेत कई बसें नियमित रूप से खराब रहती हैं।

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​कर्मचारियों ने निरीक्षण टीम को बताया, "लगातार शिकायतों के बावजूद समय पर रखरखाव और मरम्मत का काम नहीं किया जा रहा है।" इसका नतीजा यह है कि कई बसें रोजाना सेवा के लिए बाहर तो भेजी जाती हैं, लेकिन रास्ते में खराब होने के कारण उन्हें वापस डिपो लाना पड़ता है। इसके अलावा कई बसों के एयर कंडीशनर (AC) लंबे समय से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे चिलचिलाती गर्मी में यात्रियों और ऑपरेटिंग स्टाफ दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

चार्जिंग पॉइंट और ड्राइवरों की भारी कमी

इस निरीक्षण ने डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल भी खोल दी। डिपो में लगभग 75 ओलेक्ट्रा बसें खड़ी हैं, लेकिन उन्हें चार्ज करने के लिए मात्र 14 चार्जिंग पॉइंट ही उपलब्ध हैं। इसके चलते बसों की चार्जिंग में काफी देरी होती है और सड़कों पर कम बसें उतर पाती हैं। वहीं, एक अन्य कंपनी की करीब 20 इलेक्ट्रिक बसों के लिए केवल 2 चार्जिंग गन काम कर रही हैं।

​इसके साथ ही जनशक्ति (Manpower) की कमी का मुद्दा भी सामने आया। कर्मचारियों का दावा है कि ड्राइवरों की भारी कमी के कारण लगभग आधी बसें डिपो में ही धूल फांक रही हैं।

​समिति के सदस्य अजय सिंह ने संबंधित अधिकारियों और बस निर्माता कंपनियों से इन समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई के यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए बसों का उचित रखरखाव और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देना अत्यंत आवश्यक है।