पेट्रोलियम मंत्रालय ने कमर्शियल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के लिए हर दिन 200 लीटर से ज़्यादा डीज़ल खरीदने पर रोक
The Petroleum Ministry has prohibited commercial transport vehicles from purchasing more than 200 litres of diesel per day.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कमर्शियल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के लिए हर दिन 200 लीटर से ज़्यादा डीज़ल खरीदने पर रोक लगा दी है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, 200 लीटर डीज़ल से एक भारी ट्रक करीब 600 km की दूरी तय कर पाएगा। इसलिए इन पाबंदियों का असर लंबी दूरी के रास्तों पर पड़ सकता है।
मुंबई में डीज़ल खरीद पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में गंभीर चिंता बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों और ऑपरेटरों का कहना है कि इन नियमों के कारण माल ढुलाई व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स) पर सीधा असर पड़ेगा और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कमर्शियल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के लिए हर दिन 200 लीटर से ज़्यादा डीज़ल खरीदने पर रोक लगा दी है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, 200 लीटर डीज़ल से एक भारी ट्रक करीब 600 km की दूरी तय कर पाएगा। इसलिए इन पाबंदियों का असर लंबी दूरी के रास्तों पर पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार, डीज़ल की खरीद पर लगाई गई सीमाएं और सख्त निगरानी से ट्रक संचालन प्रभावित होगा। इससे न केवल ट्रकों की उपलब्धता कम हो सकती है, बल्कि डिलीवरी समय भी बढ़ जाएगा। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों पर पड़ेगा, जो रोज़ाना डीज़ल पर आधारित व्यवसाय चलाते हैं।
यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर केवल ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्माण सामग्री, FMCG, रिटेल और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला पर भी दिखाई देगा। इससे बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और सप्लाई में देरी आम हो सकती है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कदम डीज़ल की अनियंत्रित खपत, जमाखोरी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे ईंधन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और नियंत्रित होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह नीति लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका प्रभाव पूरी शहरी अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर देखने को मिल सकता है।


