हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी धोखाधड़ी और जालसाजी मामला: मुंबई कोर्ट ने पूर्व राज्यसभा सांसद अख्तर रिजवी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
High-profile property fraud and forgery case: Mumbai court rejects anticipatory bail plea of former Rajya Sabha MP Akhtar Rizvi
मुंबई की सत्र अदालत ने बांद्रा स्थित जमीन पर मृत महिला के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति हथियाने के मामले में पूर्व राज्यसभा सांसद अख्तर रिजवी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने हिरासत में पूछताछ को जरूरी माना है।
मुंबई (28 जुलाई 2026): मुंबई की एक विशेष सत्र अदालत ने हाई-प्रोफाइल संपत्ति धोखाधड़ी और कूटरचित (जाली) दस्तावेज बनाने के मामले में पूर्व राज्यसभा सांसद और बिल्डर अख्तर हसन रिजवी की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail) खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश जाधव की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि आरोपी की प्रथम दृष्टया अपराध में गहरी संलिप्तता नजर आती है और सच्चाई सामने लाने के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) आवश्यक है।
अख्तर रिजवी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत मामला दर्ज है। पुलिस जांच के अनुसार, रिजवी पर बांद्रा स्थित एक बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। मूल संपत्ति मालिक हंजानी नूरबीबी कालू की मृत्यु 1968/1971 में ही हो चुकी थी, लेकिन उनके निधन के सालों बाद एक "नकली महिला" को संपत्ति पंजीकरण कार्यालय में खड़ा करके फर्जी सेल डीड (सेल डीड) निष्पादित कराई गई थी।
हालांकि, रिजवी के वकील ने उनके 84 वर्ष के होने और किसी भी आपराधिक रिकॉर्ड न होने का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उनके हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर्मचारी द्वारा किया गया था, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।


