"कोई याचिका नहीं, केवल पत्र प्रतिनिधित्व": CJI सूर्यकांत ने NEET प्रदर्शन मामले पर सुनवाई से इनकार की खबरों का किया खंडन
"No petition, only letter representation": CJI Surya Kant refutes reports of refusal to hear NEET protest case
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस की छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई औपचारिक याचिका (Writ Petition) दायर नहीं की गई थी, बल्कि केवल एक पत्र प्रतिनिधित्व दिया गया था। उन्होंने मीडिया में आई उन खबरों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने 24 जुलाई 2026 को खुली अदालत में मीडिया रिपोर्ट्स को "पूर्णतः असत्य, गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह" करार देते हुए खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई या लिस्टिंग से इनकार कर दिया था।
मुख्य बिंदु:
- पंजीकृत याचिका अनुपस्थित: मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई के CJP/NEET छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के संबंध में शीर्ष अदालत के समक्ष कोई भी औपचारिक रिट याचिका (Writ Petition) दायर नहीं की गई थी।
- केवल पत्र प्रतिनिधित्व (Representation): CJI ने बताया कि एडवोकेट नरेंद्र मिश्रा द्वारा केवल एक पत्र प्रतिनिधित्व (Letter Representation) भेजा गया था। बिना किसी औपचारिक कागजी कार्रवाई या याचिका पंजीकरण के किसी सामान्य पत्र को याचिका मानकर सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता।
- मीडिया रिपोर्टिंग पर चिंता: कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौखिक मेंशनिंग के दौरान CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की: "पिछले दो दिनों में एक गलत बयानबाजी की गई कि मामला दायर हुआ था और मीडिया ने गैर-जिम्मेदाराना तरीके से रिपोर्ट किया कि CJI ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सुबह 10 बजे तक कोर्ट में एक पन्ना भी दायर नहीं हुआ था। जब कोई याचिका दायर ही नहीं हुई, तो सुनवाई का प्रश्न ही नहीं उठता।"
"पिछले दो दिनों में एक गलत बयानबाजी की गई कि मामला दायर हुआ था और मीडिया ने गैर-जिम्मेदाराना तरीके से रिपोर्ट किया कि CJI ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सुबह 10 बजे तक कोर्ट में एक पन्ना भी दायर नहीं हुआ था। जब कोई याचिका दायर ही नहीं हुई, तो सुनवाई का प्रश्न ही नहीं उठता।"
घटना की पृष्ठभूमि
इससे पूर्व 22 जुलाई को, एक वकील ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के वीडियो क्लिप दिखाते हुए मौखिक रूप से मामले का संज्ञान लेने की अपील की थी। उस दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि मेंशनिंग स्टेज पर अदालत वीडियो देखने में अपना समय नष्ट नहीं करना चाहती। इसे मीडिया के एक वर्ग द्वारा "याचिका खारिज करने" के रूप में रिपोर्ट किया गया था, जिसका CJI ने अब आधिकारिक खंडन किया है।


