मुंबई का कारोबारी डिजिटल अरेस्ट, 14 दिन में ठगों को किया 7.9 करोड़ रुपये ट्रांसफर

Mumbai businessman digitally arrested, transfer of Rs 7.9 crore to thugs in 14 days

मुंबई का कारोबारी डिजिटल अरेस्ट, 14 दिन में ठगों को किया 7.9 करोड़ रुपये ट्रांसफर

देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में डिजिटल अरेस्ट का बहुत बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई में साइबर ठगों ने एक 73 साल के टूर एंड ट्रैवल कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऐसा डराया कि उन्होंने 14 दिनों के भीतर 7.9 करोड़ रुपए गंवा दिए। अंधेरी के रहने वाले इस कारोबारी से हुई साइबर ठगी की जांच अब मुंबई की वेस्ट साइबर पुलिस कर रही है।

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में डिजिटल अरेस्ट का बहुत बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई में साइबर ठगों ने एक 73 साल के टूर एंड ट्रैवल कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऐसा डराया कि उन्होंने 14 दिनों के भीतर 7.9 करोड़ रुपए गंवा दिए। अंधेरी के रहने वाले इस कारोबारी से हुई साइबर ठगी की जांच अब मुंबई की वेस्ट साइबर पुलिस कर रही है।

 

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क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, 5 जुलाई को कारोबारी को व्हाट्सऐप पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उनका नाम जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। कॉल करने वाले की व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर दिल्ली पुलिस की तस्वीर लगी हुई थी, जिससे कारोबारी को उस पर विश्वास हो गया।

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कैसे की ठगी?
इसके बाद ठगों ने उन्हें यह कहकर डराया कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए किसी को भी इसकी जानकारी न दें। कई दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए उनकी पूछताछ की गई। एक व्यक्ति (जिसने अपना नाम राहुल गुप्ता बताया) ने दावा किया कि कारोबारी के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक सरकारी बैंक में खाता खोला गया है। इसमें 7 करोड़ रुपए जमा हैं। उसने जल्द गिरफ्तारी की धमकी भी दी। ठगों ने कारोबारी को डर के माहौल में रखा और लगातार पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी दस्तावेज भी भेजे।

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7.9 करोड़ रुपए ठगों के बताए बैंक खातों में भेजे
वहीं, खुद को दिल्ली साइबर पुलिस की अधिकारी निशा गुप्ता बताने वाली एक महिला ने कहा कि अदालत के आदेश के तहत जांच के लिए कारोबारी अपने सभी म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक खातों की रकम बताए गए निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करें। इस दावे को सही साबित करने के लिए एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी भेजा गया। लगातार दबाव और डर के कारण कारोबारी ने 7 जुलाई से 16 जुलाई के बीच छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 7.9 करोड़ रुपए ठगों की ओर से बताए गए निजी बैंक खातों में भेज दिए।

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कैसे हुआ फ्रॉड का खुलासा?
इस पूरे धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब 18 जुलाई को वेस्ट साइबर पुलिस के अधिकारी उनके घर पहुंचे और उन्हें बताया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर वेस्ट साइबर पुलिस ने 21 जुलाई को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

पैसे वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू
पुलिस ने ठगी गई 7.9 करोड़ रुपए की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मुंबई पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिली सूचना के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है और ठगी गई 7.9 करोड़ रुपए की राशि को रिकवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।