मुंबई : केवल महिलाओं' के लिए प्रचारित टूर पैकेज में पुरुष यात्रियों को भी शामिल किए जाने के मामले में एक ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना

Mumbai: Travel company fined for including male travelers in a tour package marketed exclusively for women.

मुंबई : केवल महिलाओं' के लिए प्रचारित टूर पैकेज में पुरुष यात्रियों को भी शामिल किए जाने के मामले में एक ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना

आयोग ने कहा कि यदि उपभोक्ता किसी विशेष सुविधा या व्यवस्था के आधार पर सेवा खरीदता है और बाद में वह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो इसे सेवा में कमी  माना जा सकता है। ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना मामले में उपभोक्ता मंच ने ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना लगाया और उपभोक्ताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने पर जोर दिया। आयोग ने कहा कि विज्ञापन और वास्तविक सेवा के बीच अंतर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
फैसले का उद्देश्य सेवा प्रदाताओं को यह संदेश देना भी है कि वे अपने प्रचार और वास्तविक सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखें। उपभोक्ताओं के क्या हैं अधिकार? भारत के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ग्राहकों को यह अधिकार प्राप्त है कि— उन्हें सेवा के बारे में सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। विज्ञापन में किए गए दावों का पालन किया जाए। सेवा में कमी होने पर शिकायत दर्ज कर सकें। उचित परिस्थितियों में मुआवजा या अन्य राहत प्राप्त कर सकें।

मुंबई : केवल महिलाओं' के लिए प्रचारित एक टूर पैकेज में पुरुष यात्रियों को भी शामिल किए जाने के मामले में एक ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है। उपभोक्ता मंच ने माना कि कंपनी ने अपने विज्ञापन और वादे के अनुरूप सेवा उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित हुआ। मामला उस समय सामने आया जब टूर में शामिल महिलाओं ने पाया कि जिस यात्रा को विशेष रूप से 'सिर्फ महिलाओं के लिए' बताया गया था, उसमें पुरुष यात्रियों को भी शामिल किया गया। शिकायत के बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां कंपनी की सेवा और प्रचार सामग्री की समीक्षा की गई।

शिकायत के अनुसार, ट्रैवल कंपनी ने अपने पैकेज का प्रचार 'केवल महिलाओं के लिए' के रूप में किया था। इसी भरोसे पर महिलाओं ने यात्रा बुक की थी। हालांकि, यात्रा शुरू होने पर पता चला कि टूर समूह में पुरुष यात्री भी मौजूद हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि इससे कंपनी द्वारा किए गए वादे का उल्लंघन हुआ और उन्हें वह अनुभव नहीं मिला, जिसका आश्वासन दिया गया था। उपभोक्ता मंच ने क्या कहा? मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता मंच ने माना कि यदि किसी सेवा को विशेष शर्तों के साथ प्रचारित किया जाता है, तो सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है कि वह उन्हीं शर्तों के अनुरूप सेवा उपलब्ध कराए।

आयोग ने कहा कि यदि उपभोक्ता किसी विशेष सुविधा या व्यवस्था के आधार पर सेवा खरीदता है और बाद में वह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो इसे सेवा में कमी  माना जा सकता है। ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना मामले में उपभोक्ता मंच ने ट्रैवल कंपनी पर जुर्माना लगाया और उपभोक्ताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने पर जोर दिया। आयोग ने कहा कि विज्ञापन और वास्तविक सेवा के बीच अंतर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
फैसले का उद्देश्य सेवा प्रदाताओं को यह संदेश देना भी है कि वे अपने प्रचार और वास्तविक सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखें। उपभोक्ताओं के क्या हैं अधिकार? भारत के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ग्राहकों को यह अधिकार प्राप्त है कि— उन्हें सेवा के बारे में सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। विज्ञापन में किए गए दावों का पालन किया जाए। सेवा में कमी होने पर शिकायत दर्ज कर सकें। उचित परिस्थितियों में मुआवजा या अन्य राहत प्राप्त कर सकें।

यदि आप किसी विशेष थीम या श्रेणी वाले टूर की बुकिंग कर रहे हैं, तो— कंपनी की शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ें। पैकेज की लिखित जानकारी सुरक्षित रखें। विज्ञापन और बुकिंग विवरण का रिकॉर्ड रखें। किसी भी बदलाव की स्थिति में तुरंत कंपनी से लिखित स्पष्टीकरण मांगें। समस्या होने पर उपभोक्ता शिकायत तंत्र का उपयोग करें। उपभोक्ता संरक्षण का महत्व विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटन उद्योग में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि कोई कंपनी किसी विशेष सुविधा का वादा करती है, तो उसे उसी के अनुरूप सेवा प्रदान करनी चाहिए। ऐसे फैसले उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने और सेवा प्रदाताओं को अधिक जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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