मुंबई : केंद्र ने केस वापसी का किया वादा, पर मुंबई पुलिस प्रदर्शनकारियों को भेज रही नोटिस
Mumbai: The Center is debating whether to withdraw the case, but the Mumbai Police is sending notices to the protesters
कॉकरोच जनता पार्टी ने बताया कि केंद्र ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस ले लिए जाएंगे। बावजूद इसके मुंबई पुलिस प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर में नामजद लोगों को नोटिस भेज रही है लोगों को उनके बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा रहा है। पुलिस का कहना था कि उन्हें जांच रोकने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। कई छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स ने बताया कि उन्हें पुलिस से नोटिस या कॉल आए, जिनमें उन्हें पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया था।
मुंबई : कॉकरोच जनता पार्टी ने बताया कि केंद्र ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस ले लिए जाएंगे। बावजूद इसके मुंबई पुलिस प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर में नामजद लोगों को नोटिस भेज रही है लोगों को उनके बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा रहा है। पुलिस का कहना था कि उन्हें जांच रोकने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। कई छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स ने बताया कि उन्हें पुलिस से नोटिस या कॉल आए, जिनमें उन्हें पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया था। इससे कई लोग उलझन में पड़ गए कि क्या मामले वापस लेने का वादा असल में शुरू हो गया है। पुलिस का कहना था कि इसमें कोई विरोधाभास नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि जांच को बीच में नहीं रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया के तहत, राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों से जुड़े मामले चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही वापस लिए जा सकते हैं।
पुलिस ने कहा, कोई निर्देश नहीं मिले
चेंबूर में हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर में नामजद एक व्यक्ति को अपना बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया। उससे पूछा गया कि क्या प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए गए थे। बॉम्बे हाई कोर्ट के वकीलों के एक ग्रुप के साथ मिलकर कई छात्रों और प्रदर्शनकारियों का पक्ष रख रहे वकील विक्रांत खरे ने कहा कि पुलिस अधिकारी अपनी जांच जारी रखे हुए हैं, जिसमें नामजद लोगों को नोटिस भेजना और उनके बयान दर्ज करना शामिल है। हमें बताया गया कि वे मामले में आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि इस प्रक्रिया को रोकने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया गया है। हम वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राज्य सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे कम से कम अंतरिम निर्देश जारी करके कार्यवाही को तब तक रोक दें, जब तक कि मामलों को वापस लेने का औपचारिक आदेश जारी न हो जाए।
क्या बोले मुंबई पुलिस के अफसर
मुंबई पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें से कुछ को समन मिल सकते हैं क्योंकि जांच अभी भी चल रही है। अधिकारी ने कहा कि केस वापस लेने की प्रक्रिया चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही शुरू होती है। तब तक हम जांच जारी रखेंगे, जिसमें आरोपियों और गवाहों के बयान दर्ज करना, पंचनामा तैयार करना और दूसरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद, केस एक स्क्रूटनी कमेटी के सामने जाते हैं जो उन्हें वापस लेने की सिफारिश करती है।
31 जुलाई तक चार्जशीट
राज्य सरकार समय-समय पर उस सरकारी आदेश को आगे बढ़ाती है जिसके तहत ऐसी एफआईआर वापस ली जाती हैं। मौजूदा समय-सीमा 31 जुलाई तक है। अधिकारी ने कहा कि इनमें से ज़्यादातर मामलों में 31 जुलाई से पहले चार्जशीट दाखिल होने की संभावना कम है क्योंकि जांच अभी चल रही है। इसलिए सरकार को समय-सीमा फिर से बढ़ानी होगी। जितनी जल्दी चार्जशीट दाखिल होगी, जीआर जारी होने के बाद उतनी ही जल्दी केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
सीजेपी ने दी वॉर्निंग
कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को अपना विरोध प्रदर्शन तब खत्म कर दिया था जब केंद्र सरकार ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उनकी मांग मान ली थी। पार्टी ने कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्रियों जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह से यह भरोसा भी मिला था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार उस भरोसे को निभाने में नाकाम रही है। प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मांग की कि सरकार समझौते का तुरंत पालन करे, सभी एफआईआर वापस ले और कानूनी मामलों पर लिखित समझौता मंगलवार तक साझा करे। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश के अन्य हिस्सों में छात्रों को अभी भी पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
जिन लोगों को नोटिस मिला, उनमें गोवंडी के रहने वाले 23 साल के अयान मिर्जा भी शामिल थे। उन्होंने 22 जुलाई को चेंबूर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर गार्डन में हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। अयान मिर्जा ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बाद, हमें आरसीएफ पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां मुझसे मेरा नाम, कॉन्टैक्ट नंबर और दूसरी जानकारी लिखने को कहा गया। बाद में, मुझे फोन करके नज़दीकी पुलिस स्टेशन बुलाया गया क्योंकि वे नोटिस देने के लिए मेरा घर नहीं ढूंढ पा रहे थे। मैं सोमवार को देवनार पुलिस स्टेशन गया और नोटिस लिया।
उन्होंने कहा कि स्टेशन पर एक अधिकारी ने उनके दोस्त का कॉन्टैक्ट नंबर भी लिया, ताकि उन्हें भी नोटिस भेजा जा सके। मिर्ज़ा ने कहा, "इसका मतलब है कि अब मेरे दोस्त को भी नोटिस मिलेगा।


