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मुंबई : जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया

मुंबई : जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम और मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वे शहर की सड़कों पर फेरी लगाने वाले सभी लोगों की पहचान का 'पूरी तरह' से सत्यापन करें। साथ ही यह भी जांच करें कि क्या इनमें कोई 'बांग्लादेशी' या अन्य 'प्रवासी' शामिल हैं जो फेरी लगाने के काम में लगे हैं। यदि ऐसे लोग मिलते हैं, तो अधिकारियों को उनके खिलाफ 'उचित' कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।
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मुंबई : डिप्टी मेयर संजय घाडी की दो टूक; चाहे मजार हो या कोई और अवैध निर्माण, सब पर चलेगा बुलडोजर 

मुंबई : डिप्टी मेयर संजय घाडी की दो टूक; चाहे मजार हो या कोई और अवैध निर्माण, सब पर चलेगा बुलडोजर  मुंबई में अवैध कब्जों को लेकर बीएमसी के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चाहे मजार हो या दूसरा कोई अवैध निर्माण, प्रशासन को कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाएगा। उन्होंने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को भी मुंबई से बाहर करने का महायुति का वादा दोहराया है। वहीं 'वंदे मातरम' को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर भी संजय घाडी ने अपनी बात रखी। 
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वसई-विरार की सड़कों का गांव के पगडंडी से भी बुरा हाल... सड़कों में गड्डे या गड्डों में सड़क, कहना मुश्किल

वसई-विरार की सड़कों का गांव के पगडंडी से भी बुरा हाल... सड़कों में गड्डे या गड्डों में सड़क, कहना मुश्किल ड्डों को अक्सर अनुशंसित गहराई तक नहीं काटा जाता है और उनमें डाम्बर को भर दिया जाता है और सड़कों को समय से पहले यातायात के लिए फिर से खोल दिया जाता है, जिससे न केवल फिर से गड्ढे बन जाते हैं, बल्कि यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं द्वारिका होटल से सोलंकी मेडिकल तक की सड़क को मात्र चार महीना पहले ही बनाया गया था, लेकिन पहली ही बरसात में सड़क टूट गईं। काम होने के बाद सड़क को फिर से बनाने के लिए ठेकेदार भूल गया। जिससे सड़क के बीचों-बीच गड्ढे बन गए हैं।
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गर्भावस्था को जारी रखने या नहीं रखने का फैसला करने का अधिकार महिला का : बांबे हाई कोर्ट

गर्भावस्था को जारी रखने या नहीं रखने का फैसला करने का अधिकार महिला का : बांबे हाई कोर्ट बांबे हाई कोर्ट ने 32 हफ्ते की गर्भवती एक विवाहित महिला को गर्भपात की अनुमति देते हुए कहा है कि गर्भावस्था को जारी रखने या नहीं रखने का फैसला करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ महिला का है। याचिकाकर्ता महिला के भ्रूण में गंभीर असामान्यताओं का पता चला था।
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