नई दिल्ली : शराब घोटाला: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर केस चलेगा या नहीं, 27 फरवरी को होगा फैसला?

New Delhi: Liquor scam: Will a case be filed against Arvind Kejriwal and Manish Sisodia or not, decision to be taken on February 27?

नई दिल्ली : शराब घोटाला: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर केस चलेगा या नहीं, 27 फरवरी को होगा फैसला?

दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े CBI केस में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ेंगी या राहत मिलेगी. इस पर अब 27 फरवरी को दिल्ली की निचली अदालत अपना फैसला सुनाएगी. राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में आरोप तय करने को लेकर आदेश सुरक्षित रख लिया है. यह केस दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था. CBI का आरोप है कि इस नीति को बनाते और लागू करते समय चुनिंदा कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. इसके बदले रिश्वत और अवैध फंडिंग हुई. इस पूरी प्रक्रिया एक आपराधिक साजिश का हिस्सा थी.

 

नई दिल्ली : दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े CBI केस में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ेंगी या राहत मिलेगी. इस पर अब 27 फरवरी को दिल्ली की निचली अदालत अपना फैसला सुनाएगी. राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में आरोप तय करने को लेकर आदेश सुरक्षित रख लिया है. यह केस दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था. CBI का आरोप है कि इस नीति को बनाते और लागू करते समय चुनिंदा कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. इसके बदले रिश्वत और अवैध फंडिंग हुई. इस पूरी प्रक्रिया एक आपराधिक साजिश का हिस्सा थी.

 

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कोर्ट में क्या हुआ?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों समेत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोप तय करने पर आदेश सुरक्षित रख लिया. CBI ने अदालत में दलील दी कि इस मामले को अलग-अलग घटनाओं में नहीं, बल्कि पूरी साजिश के रूप में देखा जाना चाहिए. आरोप तय करने के स्तर पर सबूतों की अंतिम सत्यता तय नहीं की जाती. 
यह आकलन ट्रायल के दौरान होगा. रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और दस्तावेज आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं. CBI का कहना है कि इस स्तर पर केवल यह देखा जाना है कि क्या प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं या नहीं.

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बचाव पक्ष का रुख
वहीं, केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से पेश वकीलों ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. नीति से जुड़े फैसले सामूहिक और वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए थे. केवल आरोपों के आधार पर ट्रायल शुरू करना कानून के खिलाफ होगा.

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27 फरवरी को क्या तय होगा?
27 फरवरी को कोर्ट यह फैसला करेगा कि आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होंगे या नहीं. यदि आरोप तय होते हैं, तो केस पूरे ट्रायल में जाएगा और यदि आरोप खारिज होते हैं, तो आरोपियों को बड़ी राहत मिल सकती है. यह फैसला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक तौर पर भी बेहद अहम माना जा रहा है.

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