मुंबई : जेल में पॉक्सो के कैदी ने महात्मा गांधी के विचार पढ़े, लिखा निबंध, बॉम्बे हाई कोर्ट ने घटाई सजा
Mumbai: POCSO prisoner reads Mahatma Gandhi's thoughts in jail, writes essay; Bombay High Court reduces sentence
By: Online Desk
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने पॉक्सो के मामले में दोषी एक युवक की सजा को लेकर नरम रुख अपनाया है, क्योंकि उसने जेल में रहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन किया था। युवक को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जिसे कोर्ट ने घटाकर 12 साल कर दिया है। पॉक्सो कानून के तहत बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले आते हैं। विशेष अदालत ने युवक को पड़ोस में रहने वाली चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था।
मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने पॉक्सो के मामले में दोषी एक युवक की सजा को लेकर नरम रुख अपनाया है, क्योंकि उसने जेल में रहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन किया था। युवक को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जिसे कोर्ट ने घटाकर 12 साल कर दिया है। पॉक्सो कानून के तहत बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले आते हैं। विशेष अदालत ने युवक को पड़ोस में रहने वाली चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था।
साल 2020 के विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने सबूतों के मद्देनजर कहा कि आरोपी ने आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो की धारा 6 के तहत अपराधकिया है, लेकिन जब उसने यह करतूत की थी, तब उसकी उम्र 20 साल थी।
हाई कोर्ट बेंच ने क्या-क्या कहा
बेंच ने कहा कि आरोपी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। उसने स्वयं में सुधार के प्रयास किए हैं, इसलिए हम उसकी सजा कम करने के पक्ष में है। इस तरह बेंच ने युवक को राहत दी। आगे बेंच ने कहा कि अपीलकर्ता (युवक) को कोविड में भी बेल पर रिहा नहीं किया गया था। वह साल 2016 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में है। यानी नौ साल से जेल में है। इस मामले में यह पहलू भी ध्यान देने योग्य है।
अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, इन सुधारात्मक कारकों पर विचार करते हुए, पीठ ने कहा, 'हमारी राय में, 12 वर्ष की सजा न्यायसंगत होगी।' पीठ ने आगे कहा कि दोषी द्वारा पहले से जेल में बिताई गई अवधि को कम की गई सजा में से घटा दिया जाएगा।
अदालत ने जुर्माना रखा बरकरार
इन दलीलों और केस को देखते हुए बेंच ने कहा कि हम युवक को राहत देने के पक्ष में है। युवक के लिए 12 साल की सजा न्यायसंगत होगी। हालांकि बेंच ने युवक पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने की रकम को बरकरार रखा है।
निबंध प्रतियोगिताओं में हुआ शामिल'
सुनवाई के दौरान युवक के वकील ने अपने मुवक्किल की सजा घटाने का आग्रह किया। उन्होंने बेंच को बताया कि युवक ने जेल में रहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन किया है। इस संबंध में उसे कई संस्थाओं की ओर से परीक्षा के बाद सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। उसने निबंध प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि 9 दिसंबर, 2016 को, पीड़िता, जिसकी उम्र उस समय पांच वर्ष थी, पानी लेने के लिए पड़ोसी के घर गई थी, जहां आरोपी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। डरी हुई बच्ची ने तुरंत परिवार को घटना के बारे में बताया, जिन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बाद में आठ वर्ष की आयु में निचली अदालत में गवाही दी। हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की की गवाही को विश्वसनीय और सुसंगत पाया, यह देखते हुए कि उसने घटना का स्पष्ट रूप से और बिना किसी प्रशिक्षण के वर्णन किया था।


