नई दिल्ली : अब एआई जनरेटेड कंटेंट पर लगाना होगा वाटरमार्क, सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी किया आदेश
New Delhi: Now, watermarks will have to be put on AI-generated content, the government has issued an order for social media platforms.
By: Online Desk
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सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के के लिए आदेश जारी किया कि वे एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाएं, गैरकानूनी, यौन शोषण वाली या धोखाधड़ी वाली एआई सामग्री रोकने में मदद मिल सके। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि ये प्लेटफॉर्म एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल (वाटरमार्क) लगाएं। ऐसी सामग्री में पहचान के लिए संकेत जरूर होने चाहिए। सरकार ने कहा कि एक बार एआई लेबल या मेटा डाटा लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकता।
नई दिल्ली : सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के के लिए आदेश जारी किया कि वे एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाएं, गैरकानूनी, यौन शोषण वाली या धोखाधड़ी वाली एआई सामग्री रोकने में मदद मिल सके। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि ये प्लेटफॉर्म एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल (वाटरमार्क) लगाएं। ऐसी सामग्री में पहचान के लिए संकेत जरूर होने चाहिए। सरकार ने कहा कि एक बार एआई लेबल या मेटा डाटा लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकता।
सरकार ने कहा कि अब मानव निर्मित या कृत्रिम रूप से बनाई गई जानकारी को स्पष्ट रूप से पहचान योग्य लेबल (वाटरमार्क) के साथ दिखाना अनिवार्य होगा। इसमें ऑडियो, वीडियो, फोटो या ग्राफिक सहित किसी भी डिजिटल सामग्री को शामिल किया गया है, जिसे कंप्यूटर या किसी संसाधन से बनाया गया, संशोधित किया गया या बदला गया हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी यूजर ऐसी सामग्री का गलत इस्तेमाल न करे। अगर कोई यूजर गैरकानूनी, अश्लील, धोखाधड़ी या बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनाए या साझा करे, तो प्लेटफॉर्म्स उसे रोकने के लिए स्वचालित (ऑटोमेटेड) तकनीक का इस्तेमाल करेंगे।
प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को कम से कम हर तीन महीने में चेतावनी देनी होगी कि नियमों का उल्लंघन करने पर दंड या सजा हो सकती है। यदि कोई नियम तोड़े, तो उसका खाता निलंबित किया जा सकता है या सामग्री को हटाया जा सकता है। सरकार ने समयसीमा भी घटा दी है। पहले 36 घंटे में कार्रवाई करनी थी, अब तीन घंटे में सूचना देना अनिवार्य है। उल्लंघन होने पर प्लेटफॉर्म्स को तुरंत उचित कार्रवाई करनी होगी। यह कदम डिजिटल मीडिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इससे यूजर्स को यह पता चलेगा कि कौन-सी जानकारी वास्तविक है और कौन-सी कृत्रिम रूप से बनाई गई है।


