मुंबई : पहले हुआ शिकार, फिर खुद बन गया ठग; मुंबई पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी का कंबोडिया कनेक्शन भी
Mumbai: First he was a victim, then he became a conman himself; the accused arrested by Mumbai Police also has a Cambodia connection.
गामदेवी पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है. रोचक बात यह है कि आरोपी खुद साइबर ठगी के इस नेटवर्क का शिकार था और बाद में उसी गिरोह का हिस्सा बन गया. यह मामला कंबोडिया से जुड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और हवाला के जरिए पैसे की हेराफेरी से जुड़ा हुआ है.
मुंबई : गामदेवी पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है. रोचक बात यह है कि आरोपी खुद साइबर ठगी के इस नेटवर्क का शिकार था और बाद में उसी गिरोह का हिस्सा बन गया. यह मामला कंबोडिया से जुड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और हवाला के जरिए पैसे की हेराफेरी से जुड़ा हुआ है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 31 वर्षीय उदय कुमार चौधरी के तौर पर हुई है.चौधरी को 6 फरवरी को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उस वक्त पकड़ा गया,जब वह कंबोडिया से भारत लौटा था.पुलिस के मुताबिक,उसके खिलाफ पहले से ही लुकआउट सर्कुलर जारी था,जिसके चलते एयरपोर्ट पर अलर्ट मिलते ही उसे हिरासत में ले लिया गया और बाद में मुंबई लाया गया.
विदेश से ऑपरेट हो रहा था पूरा रैकेट
इस केस की शुरुआत पिछले साल हुई थी,जब गामदेवी पुलिस ने कंबोडिया से संचालित हो रहे एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया था.उस वक्त पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया था,जो ऑनलाइन निवेश के नाम पर भारतीय नागरिकों को ठग रहे थे. जांच में सामने आया कि यह पूरा रैकेट विदेश से ऑपरेट हो रहा था और ठगी की रकम हवाला के जरिए इधर-उधर की जाती थी.बाद में कुल 16 आरोपियों की पहचान हुई,जिनमें से दो विदेश में होने के चलते फरार बताए जा रहे थे.
पुलिस के अनुसार,आरोपी लोग सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर निवेश करवाते थे.इसके बाद पीड़ितों से निकाली गई रकम को हवाला चैनलों से ट्रांसफर किया जाता था.सभी आरोपी आपस में टेलीग्राम के जरिए लगातार संपर्क में रहते थे. इसी तकनीकी जांच के दौरान उदय चौधरी के टेलीग्राम अकाउंट का सुराग मिला,जिससे उसकी लोकेशन और गतिविधियों का पता चला.
पूछताछ में सामने आया कि उदय कुमार चौधरी ने कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया. ठगी से जुटाई गई रकम को वह पहले निकालता था और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी,खासतौर पर यूएसडीटी में बदलकर चीनी माफिया तक पहुंचाता था.पुलिस का कहना है कि हवाला ट्रांजेक्शन में उसकी अहम भूमिका थी और वह इस नेटवर्क का एक अहम कड़ी बन चुका था.
खुद था शिकार,फिर बना साइबर ठग
दिलचस्प बात यह है कि उदय कुमार खुद भी साइबर क्राइम स्लेवरी का शिकार रह चुका है.पुलिस के मुताबिक,वह कंबोडिया में एचपी पे–हाय पे नाम की एक कंपनी में डेटा ऑपरेटर के तौर पर काम करने गया था.शुरुआत में वह भी मजबूरी में इस सिस्टम का हिस्सा बना,लेकिन धीरे-धीरे चीनी माफिया के लिए काम करने लगा,जो इस पूरे साइबर फ्रॉड रैकेट को चला रहे थे.
चौधरी का दावा है कि कंबोडिया में उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ था और वहां की पुलिस से छूटने के लिए उसने करीब 6 लाख रुपये का जुर्माना भरा. जेल से बाहर आने के बाद वह भारत लौटा,लेकिन यहां आते ही कानून के शिकंजे में फंस गया.फिलहाल पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े एक और आरोपी की तलाश कर रही है,जो अभी फरार बताया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.


