मुंबई : फ्री एंट्री, क्यूआर कोड और हजारों रंग, काला घोड़ा फेस्टिवल में उमड़ा कला प्रेमियों का सैलाब
Mumbai: Free entry, QR codes and thousands of colours, Kala Ghoda Festival draws a wave of art lovers
मुंबई जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, अपनी तेज रफ्तार जिंदगी के लिए मशहूर है. इसी भागदौड़ के बीच साल का एक समय ऐसा आता है, जब यह शहर कला और संस्कृति के रंगों में पूरी तरह डूब जाता है. हम बात कर रहे हैं काला घोड़ा फेस्टिवल की, जो हर साल मुंबई की सांस्कृतिक पहचान बनकर उभरता है. दक्षिण मुंबई के ऐतिहासिक काला घोड़ा इलाके में लगने वाला यह फेस्टिवल न केवल देश बल्कि विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है. इस साल काला घोड़ा फेस्टिवल में कला के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय संदेशों का भी अनोखा संगम देखने को मिल रहा है.
मुंबई. मुंबई जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, अपनी तेज रफ्तार जिंदगी के लिए मशहूर है. इसी भागदौड़ के बीच साल का एक समय ऐसा आता है, जब यह शहर कला और संस्कृति के रंगों में पूरी तरह डूब जाता है. हम बात कर रहे हैं काला घोड़ा फेस्टिवल की, जो हर साल मुंबई की सांस्कृतिक पहचान बनकर उभरता है. दक्षिण मुंबई के ऐतिहासिक काला घोड़ा इलाके में लगने वाला यह फेस्टिवल न केवल देश बल्कि विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है. इस साल काला घोड़ा फेस्टिवल में कला के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय संदेशों का भी अनोखा संगम देखने को मिल रहा है.
इस साल काला घोड़ा फेस्टिवल की शुरुआत एक बेहद खास और सकारात्मक संदेश के साथ हुई है. पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों को बचाने की अहमियत को समझाने के लिए चर्चगेट स्टेशन के बाहर स्थित ग्राउंड में एक विशेष इंस्टॉलेशन लगाया गया है. इस प्रोजेक्ट को छात्रों ने तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करना और ध्वनि प्रदूषण को कम करने का संदेश देना है. स्टेशन के बाहर से गुजरने वाला हर व्यक्ति इस कलाकृति को देखकर रुकने पर मजबूर हो जाता है. काला घोड़ा फेस्टिवल में एंट्री पूरी तरह फ्री रखी गई है, बस आगंतुकों को क्यूआर कोड स्कैन करना होता है.
मिथिला पेंटिंग और बॉम्बे आर्ट बने आकर्षण
काला घोड़ा के मुख्य इलाके में प्रवेश करते ही हस्तशिल्प और कला के कई स्टॉल्स दर्शकों का स्वागत करते हैं. इस बार बिहार की प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग फेस्टिवल का बड़ा आकर्षण बनी हुई है. हाथ से बने कागज पर उकेरी गई यह पेंटिंग पूरी तरह पारंपरिक थीम पर आधारित है और दर्शकों को भारतीय लोक कला से रूबरू कराती है. इसके ठीक पास बॉम्बे आर्ट का स्टॉल भी लगाया गया है, जहां पेंटिंग्स में मुंबई की आत्मा दिखाई देती है. इन चित्रों में शहर की ऐतिहासिक इमारतों, गलियों और रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद खूबसूरती से कैनवास पर उतारा गया है. मुंबई के पुराने और नए स्वरूप से जुड़ाव रखने वालों के लिए यह स्टॉल खास आकर्षण बना हुआ है.


