अफगानिस्तान में जंग और जम्मू में मचाया आतंक... किश्तवाड़ एनकाउंटर में मारा गया जैश आतंकी आदिल था अफगान रिटर्न
War in Afghanistan and terror in Jammu... Jaish terrorist Adil, killed in Kishtwar encounter, was an Afghan returnee.
घने जंगलों में 4 फरवरी को भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए जैश ए मोहम्मद के आतंकी स्वारुद्दीन ख़ान उर्फ आदिल को लेकर खुफिया एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख़्वाह के कोहाट जिले का रहने वाला आदिल भारत में घुसपैठ से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो की सेनाओं के खिलाफ हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर जैश ए मोहम्मद की तरफ़ से लड़ा था.
किश्तवाड़ : घने जंगलों में 4 फरवरी को भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए जैश ए मोहम्मद के आतंकी स्वारुद्दीन ख़ान उर्फ आदिल को लेकर खुफिया एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख़्वाह के कोहाट जिले का रहने वाला आदिल भारत में घुसपैठ से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो की सेनाओं के खिलाफ हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर जैश ए मोहम्मद की तरफ़ से लड़ा था. जानकारी के मुताबिक साल 2016 में जैश ए मोहम्मद ने अपने बन्नू स्थित ट्रेनिंग कैम्प में आदिल को ट्रेन करके अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के साथ लड़ने के लिए भेजा था.
आदिल अफगान के कुनार में पोस्टेड था
आदिल के अफगानिस्तान में पोस्टेड होने के दौरान की तीन तस्वीरें मौजूद हैं और जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में नाटो और अमेरिका के साथ लड़ाई के दौरान आतंकी स्वारुद्दीन खान उर्फ आदिल कुनार प्रांत में पोस्टेड था. जैश ए मोहम्मद के आतंकी स्वारुद्दीन उर्फ आदिल पर जम्मू कश्मीर पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम भी रखा हुआ था और बीते 2 साल से आदिल और उसके साथी एनकाउंटर के दौरान सेना को चकमा देकर भागने में कामयाब हो रहे थे. हालांकि 4 फरवरी को त्राशी के जंगल में आखिरकर आतंकी स्वारुद्दीन उर्फ आदिल को मार गिराया गया.
आदिल के ग्रुप के अन्य तीन आतंकी सैफुल्लाह, फरमान और बाशा अभी भी किश्तवाड़ के जंगलों में छिपे हुए हैं और भारतीय सेना ने इनकी घेराबंदी की हुई है. इन तीनों पर भी 5-5 लाख का इनाम जम्मू कश्मीर पुलिस ने रखा है. आतंकी स्वारुद्दीन उर्फ आदिल बीते 10 महीने में भारतीय सेना के द्वारा जैश ए मोहम्मद का मारा गया चौथा आतंकी है, जो अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो सेना के खिलाफ भी लड़ चुका है.
अफगानिस्तान में लड़कर लौटे थे पाकिस्तान
इससे पहले भारतीय सेना ने पिछले साल 11 अप्रैल को किश्तवाड़ के छतरू इलाके में जैश के आतंकी असद उर्फ रहमान उर्फ बच्चा को मार गिराया था. ख़ैबर पख्तूनख़्वाह प्रांत से ताल्लुक़ रखने वाला असद उर्फ रहमान उर्फ बच्चा भी अफगानिस्तान में 2021 तक हक्कानियों के साथ मिलकर जैश ए मोहम्मद के लिए अमेरिका और नाटो सेनाओं के साथ लड़ रहा था. इसी तरह इसी एनकाउंटर में मारा गया फरमान उल्लाह उर्फ़ फ़रमान कंधार में तालिबान के साथ मिलकर अमेरिका और नाटो के साथ 2021 तक लड़ रहा था.
26 जून 2025 को मारा गया जैश ए मोहम्मद का एक और आतंकी रुक़सार अहमद उर्फ मौलवी को जैश ए मोहम्मद ने ट्रेन करके तालिबान के साथ मिलकर ग़ज़नी प्रांत में लड़ने के लिए भेजा था. इसी कड़ी में बीते 10 महीने में स्वारुद्दीन उर्फ आदिल चौथा ऐसा मारा गया आतंकी है, जो अफगानिस्तान में जंग के बाद भारत में घुसपैठ करके आतंकवाद फैलाने आया था और मारा गया.
सोवियत संघ के जमाने से चल रहा जिहाद
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, अफगानिस्तान में आतंकवाद फैलाने वाले आतंकियों को भारत भेजने की मोडस ऑपरेंडी कोई नई नहीं है. 80 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ अफगान जिहाद के दौर में जब सोवियत संघ के सैनिक 1989 में अफगानिस्तान छोड़ कर वापस चले गए थे, तब भी अफगानिस्तान में सोवियत के खिलाफ तालिबान और अन्य संगठन के साथ मिलकर लड़ने वाले आतंकियों के पाकिस्तान वापस आने के बाद उन्हें कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए ISI ने भेजा था और यही से जम्मू कश्मीर में व्यवस्थित आतंकवाद की शुरुआत पाकिस्तान ने की थी. जो 1989 तक अफ़ग़ान मुजाहिद थे वो 1990 के बाद से सज्जाद अफगानी के नेतृत्व में हरकत उल मुजाहिद्दीन और हाफिज मुहम्मद सईद के नेतृत्व में लश्कर ए तैयबा के आतंकी बन गए.


