मुंबई : फायरिंग मामले में बाधा बनी BNSS की धारा 303, बिश्नोई गैंग पर कार्रवाई में क्यों बेबस है मुंबई पुलिस
Mumbai: Section 303 of the BNSS has become an obstacle in the firing case; why is the Mumbai police helpless in taking action against the Bishnoi gang?
मुंबई पुलिस और देश के कई राज्यों की पुलिस इन दिनों एक असामान्य और जटिल कानूनी स्थिति का सामना कर रही है। बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों में पुलिस उन लोगों को हिरासत में लेने या उनसे प्रभावी पूछताछ करने में असमर्थ है, जिन्हें वह इन अपराधों का कथित मास्टरमाइंड मानती है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 का लागू होना है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा सक्रिय किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय के अधिकारी कानून के प्रावधानों और सुरक्षा इनपुट्स को ध्यान में रखते हुए कड़े फैसले लेते हैं।
मुंबई : मुंबई पुलिस और देश के कई राज्यों की पुलिस इन दिनों एक असामान्य और जटिल कानूनी स्थिति का सामना कर रही है। बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों में पुलिस उन लोगों को हिरासत में लेने या उनसे प्रभावी पूछताछ करने में असमर्थ है, जिन्हें वह इन अपराधों का कथित मास्टरमाइंड मानती है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 का लागू होना है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा सक्रिय किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय के अधिकारी कानून के प्रावधानों और सुरक्षा इनपुट्स को ध्यान में रखते हुए कड़े फैसले लेते हैं।
रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग और बिश्नोई गैंग का दावा
रविवार को मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना ने एक बार फिर मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना की जिम्मेदारी एक ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट ने ली है, जो खुद को बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ बता रहा है। इससे पहले भी ऐसे कई मामलों में इसी तरह के सोशल मीडिया दावे सामने आ चुके हैं। हालांकि, यदि इस मामले में भी बिश्नोई गैंग की संलिप्तता सामने आती है तो मुंबई पुलिस के सामने वही पुरानी समस्या खड़ी हो जाएगी। आरोपियों तक कानूनी रूप से पहुंच न होना।
जेल में होने के बावजूद आरोपी फरार
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 14 अप्रैल 2024 को बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट यानी अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने अपनी चार्जशीट में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को मुख्य साजिशकर्ता बताया था। हैरानी की बात यह रही कि चार्जशीट में उसे 'फरार आरोपी' के रूप में दर्शाया गया, जबकि उस समय वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद था। आमतौर पर फरार आरोपी वह होता है, जो पुलिस की पकड़ से बाहर हो और खुलेआम घूम रहा हो। लेकिन इस मामले में स्थिति उलट थी। आरोपी जेल में था, फिर भी मुंबई पुलिस उससे पूछताछ या कस्टडी हासिल नहीं कर सकी।
.BNSS की धारा 303 पुलिस की राह में कैसे बनी दीवार?
मुंबई पुलिस की इस असहाय स्थिति की जड़ BNSS की धारा 303 है। इस धारा के तहत यदि किसी मामले की जांच NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी कर रही हो तो केंद्र या राज्य सरकार यह आदेश दे सकती है कि आरोपी को जिस जेल में रखा गया है, वहां से बाहर नहीं निकाला जाएगा। धारा 303(2) के तहत इस प्रावधान को लागू करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें हैं। इसमें अपराध की गंभीरता और प्रकृति, आरोपी को बाहर निकालने से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और व्यापक जनहित शामिल है। इन शर्तों के आधार पर गृह मंत्रालय यह तय करता है कि आरोपी को किसी अन्य एजेंसी या राज्य पुलिस को सौंपा जाए या नहीं।


