मुंबई: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड ट्विन टनल प्रोजेक्ट में बड़ी उपलब्धि
Mumbai: Major achievement in Goregaon-Mulund Link Road Twin Tunnel Project
मुंबई के महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड ट्विन टनल प्रोजेक्ट ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। परियोजना के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन को पूरी तरह से असेंबल कर लिया गया है। इसके सभी प्रमुख हिस्सों को जोड़ने का अंतिम काम गुरुवार को पूरा होने की उम्मीद है। टनल निर्माण शुरू होने से पहले इसे परियोजना की दिशा में बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।
मुंबई: मुंबई के महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड ट्विन टनल प्रोजेक्ट ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। परियोजना के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन को पूरी तरह से असेंबल कर लिया गया है। इसके सभी प्रमुख हिस्सों को जोड़ने का अंतिम काम गुरुवार को पूरा होने की उम्मीद है। टनल निर्माण शुरू होने से पहले इसे परियोजना की दिशा में बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अधिकारियों के अनुसार, टीबीएम के सभी जरूरी सिस्टम की जांच पूरी कर ली गई है। मशीन के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, हाइड्रोलिक, कंट्रोल और सेफ्टी सिस्टम के इंटीग्रेटेड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। अब अंतिम तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीन जमीन के अंदर सुरंग बनाने का काम शुरू करेगी।
अतिरिक्त नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर ने बताया कि टीबीएम को सुरंग निर्माण के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तकनीकी और सुरक्षा जांच पूरी होने तथा प्रमाणन मिलने के बाद ही मशीन से टनल बनाने का काम शुरू किया जाएगा। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि निर्माण कार्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो। गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी सुधारने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है। इस परियोजना का उद्देश्य गोरेगांव और मुलुंड के बीच यात्रा समय को कम करना और शहर की सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है।
वर्तमान में मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच आवागमन के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना पूरी होने के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा संपर्क बेहतर होगा। इससे लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है और शहर के परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा ट्विन टनल का निर्माण है। जमीन के नीचे बनने वाली इन सुरंगों के लिए अत्याधुनिक टीबीएम तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। टीबीएम मशीनें बड़े व्यास की सुरंगों को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं। इनके जरिए खुदाई के साथ-साथ सुरंग की संरचना को मजबूत करने का काम भी किया जाता है।
पहली टीबीएम के असेंबल होने के बाद अब परियोजना अगले चरण में प्रवेश कर रही है। मशीन के संचालन से पहले विशेषज्ञों की टीम सभी सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच करेगी। इसमें मशीन के दबाव नियंत्रण, खुदाई प्रणाली, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा शामिल होगी। बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर की भूमिगत परियोजना में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सुरंग निर्माण के दौरान आसपास के क्षेत्रों पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए आधुनिक तकनीक और निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा।


