बेस्ट हड़ताल का तीसरा दिन: एकनाथ शिंदे के साथ देर रात तक चली बैठक, समाधान की आस में लाखों मुंबईकर
Third day of the BEST strike: Late-night meeting with Eknath Shinde; lakhs of Mumbaikars hopeful for a resolution.
मुंबई में बेस्ट (BEST) बस कर्मचारियों की हड़ताल के तीसरे दिन भी गतिरोध बरकरार है। लाखों यात्रियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ आंदोलनकारी यूनियनों की बैठक देर रात तक जारी रही। संविदा कर्मचारी 'समान काम, समान वेतन' और बुनियादी सुविधाओं की मांग पर अड़े हैं, जबकि पूरा शहर परिवहन संकट से जूझ रहा है।
मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली बेस्ट (BEST) बसों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रहने से शहर का संकट और गहरा गया है। लाखों दैनिक यात्रियों, कामकाजी लोगों और छात्रों को हो रही भारी असुविधा के बीच इस गतिरोध को सुलझाने के लिए राजनीतिक स्तर पर कमान संभाल ली गई है। आंदोलनकारी कर्मचारी यूनियनों और नेताओं के साथ मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की एक महत्वपूर्ण मैराथन बैठक देर रात तक जारी रही, ताकि हड़ताल का कोई सर्वमान्य समाधान निकाला जा सके।
थमे रहे बसों के पहिए, तीसरे दिन भी जनता बेहाल
लगातार तीसरे दिन मुंबई की सड़कों से बेस्ट बसें नदारद रहीं। प्रशासन द्वारा मेस्मा (MESMA) लगाने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद संविदा (Wet-lease) पर काम करने वाले चालकों और संवाहकों (कंडक्टरों) ने काम पर लौटने से साफ इनकार कर दिया है।
सुबह से ही मुंबई के प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस टर्मिनलों के बाहर यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। ऑटो और टैक्सी चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम जनता की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।
मैराथन बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
देर रात तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में आंदोलनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई:
- समान काम, समान वेतन: संविदा कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान ही वेतन और भत्ते दिए जाएं, क्योंकि वे समान रूट पर उतना ही काम करते हैं।
- बुनियादी सुविधाएं: विभिन्न बस डिपो में पीने के पानी, साफ शौचालय और विश्राम कक्ष (Restrooms) जैसी बुनियादी मानवीय सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
- नौकरी की सुरक्षा: निजी ऑपरेटरों के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को मनमाने ढंग से नौकरी से निकाले जाने पर रोक लगाई जाए।
समाधान की उम्मीद
सूत्रों के मुताबिक, बैठक काफी सकारात्मक माहौल में हुई है। प्रशासन और सरकार की ओर से कर्मचारियों की कुछ बुनियादी मांगों को तुरंत पूरा करने और वेतन विसंगति जैसे बड़े नीतिगत मुद्दों पर एक विशेष समिति बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
लाखों मुंबईकर उम्मीद कर रहे हैं कि इस देर रात चली बैठक से कोई ठोस नतीजा निकलेगा और जल्द ही सड़कों पर बेस्ट बसों की सेवा बहाल हो सकेगी, ताकि पिछले तीन दिनों से जारी इस अभूतपूर्व परिवहन संकट से राहत मिल सके।


