उल्वे के बालाजी मंदिर प्रोजेक्ट पर विवाद, मैंग्रोव बफर ज़ोन में निर्माण को लेकर कानूनी नोटिस
Controversy erupts over Ulwe Balaji Temple project; legal notice issued for construction in mangrove buffer zone
नवी मुंबई के उल्वे स्थित बालाजी मंदिर परियोजना को लेकर नया विवाद सामने आया है। मैंग्रोव बफर ज़ोन में कंपाउंड वॉल निर्माण के आरोपों के बाद संबंधित पक्षों को कानूनी नोटिस भेजा गया है। मामले की जांच और दस्तावेजों की समीक्षा की मांग की गई है। #Ulwe #BalajiTemple #NaviMumbai #Mangrove #EnvironmentalIssue #MaharashtraNews #BreakingNews #CIDCO
नवी मुंबई के उल्वे क्षेत्र में प्रस्तावित बालाजी मंदिर परियोजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। परियोजना स्थल पर मैंग्रोव बफर ज़ोन के भीतर कंपाउंड वॉल निर्माण किए जाने के आरोपों के बाद संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं को कानूनी नोटिस भेजा गया है। मामले ने पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मंदिर परियोजना से जुड़े क्षेत्र में मैंग्रोव संरक्षण नियमों का उल्लंघन करते हुए कंपाउंड वॉल का निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह इलाका संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यहां किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है।
कानूनी नोटिस में संबंधित विभागों से निर्माण कार्य की वैधता, पर्यावरणीय मंजूरियों और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
मैंग्रोव क्षेत्र समुद्री तटों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गतिविधि निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुसार ही होनी चाहिए।
दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े पक्षों का कहना है कि सभी कार्य संबंधित नियमों और मंजूरियों के अनुरूप किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि किसी भी प्रकार के पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित एजेंसियों के समक्ष सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे।
फिलहाल मामला संबंधित अधिकारियों और नियामक संस्थाओं के समक्ष है। जांच और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य नियमों के अनुरूप है या नहीं। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।


