भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला: पनवेल जंक्शन का दबाव कम करने के लिए 172 करोड़ रुपये की नई रेल लाइन को मंजूरी

Indian Railways' major decision: Approval for a new rail line worth Rs 172 crore to ease pressure on Panvel Junction

भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला: पनवेल जंक्शन का दबाव कम करने के लिए 172 करोड़ रुपये की नई रेल लाइन को मंजूरी

महाराष्ट्र में माल ढुलाई और रेल यातायात को और अधिक सुगम बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने 172 करोड़ रुपये की 'सोमटाने-चिखली कॉर्ड लाइन' (Somtane-Chikhli Chord Line) परियोजना को मंजूरी दे दी है। 3.7 किलोमीटर लंबी इस नई लाइन के बनने से मालगाड़ियों को भीड़भाड़ वाले पनवेल जंक्शन (Panvel Junction) पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे प्रति ट्रेन लगभग 110 मिनट के समय की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स क्षमता में भारी सुधार होगा।

मुंबई: महाराष्ट्र में रेल क्षमता बढ़ाने और माल ढुलाई (Freight Movement) को रफ्तार देने के लिए भारतीय रेलवे ने एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना को अपनी हरी झंडी दे दी है। रेलवे बोर्ड ने मध्य रेलवे (Central Railway) के नेटवर्क पर 172 करोड़ रुपये की लागत से 'सोमटाने-चिखली कॉर्ड लाइन' (Somtane-Chikhli Chord Line) के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दी है।

क्या है यह नया प्रोजेक्ट?

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कर्जत रूट पर स्थित 'चिखली' और रोहा रूट पर स्थित 'सोमटाने' के बीच एक सीधा रेल संपर्क स्थापित करने के लिए यह 3.7 किलोमीटर लंबी नई कॉर्ड लाइन बिछाई जाएगी। वर्तमान में इस सीधे लिंक के न होने के कारण कर्जत और रोहा के बीच चलने वाली ट्रेनों को मुंबई क्षेत्र के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक—पनवेल जंक्शन से होकर गुजरना पड़ता है। पनवेल जंक्शन पहले से ही रोहा, जेएनपीटी (JNPT), कर्जत और दिवा रूट से आने वाले भारी ट्रैफिक का बोझ उठा रहा है।

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प्रति ट्रेन 110 मिनट की होगी बचत

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इस नई कॉर्ड लाइन के चालू होने के बाद मालगाड़ियों को पनवेल जंक्शन के अंदर प्रवेश करने और अपना इंजन रिवर्स (Engine Reversal) करने की समय लेने वाली प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। मालगाड़ियां अब सीधे पनवेल को बाईपास कर सकेंगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे मालगाड़ियों के आवागमन में प्रति ट्रेन औसतन 110 मिनट के 'डिटेंशन टाइम' (रुकने के समय) की भारी बचत होगी।

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JNPT और माल ढुलाई को मिलेगा बड़ा फायदा

यह परियोजना विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) से जुड़े माल ढुलाई ट्रैफिक के लिए वरदान साबित होगी, जो भारत के लगभग 60 प्रतिशत कंटेनर ट्रैफिक को संभालता है। मालगाड़ियों का टर्नअराउंड समय (Turnaround Time) कम होने से लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक दक्षता में जबर्दस्त सुधार होगा।

​रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, इस लाइन के निर्माण के बाद हर साल लगभग 90 लाख टन (9 MTPA) अतिरिक्त यातायात को संभालने की क्षमता पैदा होगी। यह प्रोजेक्ट न केवल माल ढुलाई के नेटवर्क को पूरा करेगा, बल्कि पनवेल जंक्शन पर ट्रैफिक का दबाव घटने से यात्री ट्रेनों के संचालन में भी काफी सुधार देखने को मिलेगा।

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