मरीजों को बड़ी राहत: निजी अस्पतालों के मनमाने बिलों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ला रही नई नीति

Major relief for patients: Maharashtra government introducing a new policy to curb arbitrary billing by private hospitals.

मरीजों को बड़ी राहत: निजी अस्पतालों के मनमाने बिलों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ला रही नई नीति

महाराष्ट्र सरकार जल्द ही राज्य के निजी अस्पतालों (Private Hospitals) द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने और भारी-भरकम बिलों पर लगाम लगाने के लिए एक ठोस नीति (Policy) लाने जा रही है। विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इस नई नीति के तहत अस्पतालों को रेट कार्ड (Rate Card) प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा और मरीजों की आर्थिक लूट करने वाले संस्थानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुंबई: निजी अस्पतालों (Private Hospitals) में इलाज के नाम पर वसूले जाने वाले भारी-भरकम बिलों से आम जनता को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। महाराष्ट्र सरकार राज्य में निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट और मनमाने शुल्कों पर अंकुश लगाने के लिए एक ठोस नीति (Policy) और संभवतः एक नया नियामक कानून लाने की पूरी तैयारी कर रही है।

​हाल ही में समाप्त हुए महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस बहुप्रतीक्षित कदम की घोषणा की गई है, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

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​विधानसभा में उठा था 'लूट' का मुद्दा

​विधानसभा सत्र के दौरान कई विधायकों ने निजी अस्पतालों, विशेष रूप से एनआईसीयू (NICU) और आपातकालीन देखभाल (Emergency Care) में वसूले जाने वाले अत्यधिक शुल्कों का मुद्दा उठाया था। सदन में जवाब देते हुए मंत्री प्रकाश आबिटकर (Prakash Abitkar) ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इन मनमाने बिलों को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही एक नीति पेश करेगी।

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​इस नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने और इसे लागू करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की जाएगी।

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​प्रस्तावित नीति की मुख्य विशेषताएं (Key Features)

​प्रस्तावित नीति और सरकार द्वारा लाए जा रहे 'क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) बिल' के मसौदे के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़े सुधार किए जाने वाले हैं:

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  • रेट कार्ड दिखाना अनिवार्य: सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को अपने रिसेप्शन डेस्क और वेबसाइट पर इलाज, सर्जरी और अन्य सेवाओं के शुल्कों का स्पष्ट 'रेट कार्ड' (Rate Card) प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
  • मानकीकृत दरें (Standardized Rates): सरकार विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए एक मानक दर तय करने पर विचार कर रही है ताकि मरीजों से मनमाना पैसा न वसूला जा सके।
  • सख्त दंड और जुर्माना: जो अस्पताल या क्लीनिक इन नियमों का उल्लंघन करेंगे या मरीजों से तय सीमा से अधिक फीस वसूलेंगे, उन पर भारी जुर्माना (5 लाख रुपये तक) और संभवतः जेल की सजा का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है।
  • पारदर्शिता: इलाज के दौरान मरीजों के परिजनों को बिलिंग और अन्य अतिरिक्त खर्चों के बारे में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी।

​सुप्रीम कोर्ट का निर्देश बना आधार

​गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भी देश भर में निजी और सरकारी अस्पतालों के इलाज के खर्च में मौजूद भारी अंतर पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (Healthcare Providers) की फीस को विनियमित (Regulate) करने के लिए उचित और तत्काल कदम उठाएं।

​क्या होगा इसका असर?

​स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) होने के बावजूद कई बार निजी अस्पताल मरीजों से 'को-पेमेंट' या अन्य हिडन चार्जेस के नाम पर भारी रकम वसूल लेते हैं। इस नीति के लागू होने से न केवल आम मरीजों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्याप्त अनिश्चितता और मुनाफे की संस्कृति पर भी लगाम लगेगी।

​हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जैसे संगठनों ने इस बिल के कुछ दंडात्मक प्रावधानों पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, लेकिन आम जनमानस के व्यापक हित को देखते हुए सरकार इसे जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के लिए प्रतिबद्ध है।