भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कदम: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का 120 kmph की रफ्तार पर सफल ट्रायल, जल्द शुरू होगी यात्री सेवा

Historic move by Indian Railways: Successful trial of the country's first hydrogen train at a speed of 120 kmph; passenger service to begin soon.

भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक कदम: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का 120 kmph की रफ्तार पर सफल ट्रायल, जल्द शुरू होगी यात्री सेवा

भारतीय रेलवे ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल करते हुए देश की पहली 'हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन' (Hydrogen-powered Train) का हरियाणा में सफलतापूर्ण स्पीड ट्रायल पूरा कर लिया है। इस पर्यावरण-अनुकूल ट्रेन ने परीक्षण के दौरान 120 किमी प्रति घंटे की शीर्ष रफ्तार को छुआ। शून्य-उत्सर्जन (Zero-emission) वाली इस ग्रीन तकनीक के सफल परीक्षण के बाद अब भारत में पहली पैसेंजर हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

जींद/नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने देश को पूरी तरह से कार्बन-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन नेटवर्क बनाने की दिशा में एक और अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। भारत की पहली 'हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन' (Hydrogen-powered Train) ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर अपना पहला हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

​इस अत्याधुनिक सेमी-हाई-स्पीड ग्रीन ट्रेन ने परीक्षण के दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की शीर्ष रफ्तार को छूकर अपनी तकनीकी क्षमता और स्थिरता का लोहा मनवाया। इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब जर्मनी, चीन और फ्रांस जैसे उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गया है, जिनके पास अपनी कमर्शियल हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक मौजूद है।

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​क्यों खास है हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन?

​यह ट्रेन भारतीय रेलवे के 'नेट-जीरो कार्बन एमिटर' (Net-Zero Carbon Emitter) बनने के मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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  • शून्य प्रदूषण (Zero Emission): यह ट्रेन डीजल या पारंपरिक बिजली के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cells) पर चलती है। रासायनिक प्रक्रिया के बाद इस ट्रेन के साइलेंसर से धुएं के बजाय केवल पानी की बूंदें और भाप (Water Vapor) बाहर निकलती है, जिससे पर्यावरण को 1% भी नुकसान नहीं होता।
  • साइलेंट और स्मूथ सफर: डीजल इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेनें बेहद शांत होती हैं। इनमें कंपन (Vibration) और शोर का स्तर न के बराबर होता है, जिससे यात्रियों को एक प्रीमियम और आरामदायक सफर का अनुभव मिलता है।

​जींद-सोनीपत रूट पर हुआ परीक्षण

​रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) की टीम की निगरानी में यह स्पीड ट्रायल आयोजित किया गया था। इस दौरान ट्रेन के इंजन की क्षमता, ब्रेकिंग सिस्टम, हाइड्रोजन गैस के दबाव के प्रबंधन और उच्च गति पर सुरक्षा मानकों की गहनता से जांच की गई। सभी सुरक्षा मापदंडों पर ट्रेन का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा।

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​जल्द शुरू होगी देश की पहली यात्री सेवा

​रेलवे बोर्ड के अनुसार, इस सफल ट्रायल के बाद अब इस रूट पर परिचालन संबंधी अंतिम मंजूरी (Safety Clearance) लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो अगले कुछ ही महीनों के भीतर हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट (89 किमी) पर देश की पहली कमर्शियल हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी जाएगी।

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​इसके बाद, दूसरे चरण में रेलवे का लक्ष्य देश के विभिन्न धरोहर (Heritage) और पहाड़ी मार्गों जैसे- कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और माथेरान हिल रेलवे पर भी 'इको-फ्रेंडली' हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का है, ताकि इन खूबसूरत पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।

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