क्या बुलडोजर से मिल सकती है सजा? आरोपी का घर तोड़ने पर क्या कहता है कानून

Supreme Court Clarifies That Houses Cannot Be Demolished Merely Because A Person Is Accused; Due Process Must Be Followed

क्या बुलडोजर से मिल सकती है सजा? आरोपी का घर तोड़ने पर क्या कहता है कानून

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार केवल आरोपी होने के आधार पर किसी का घर नहीं तोड़ा जा सकता। अवैध निर्माण हटाने के लिए भी कानूनी प्रक्रिया और नोटिस जरूरी है।

देश में पिछले कुछ वर्षों में “बुलडोजर कार्रवाई” को लेकर कई बड़े विवाद सामने आए हैं। कई मामलों में आरोपियों के घरों पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या केवल किसी व्यक्ति के आरोपी होने के आधार पर उसका घर गिराया जा सकता है। भारतीय संविधान, सुप्रीम कोर्ट और अतिक्रमण कानून इस विषय पर क्या कहते हैं, इसे लेकर कानूनी बहस लगातार जारी है।


भारत के संविधान के अनुसार किसी भी नागरिक को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 300A में संपत्ति के अधिकार को कानूनी संरक्षण दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 21 के तहत “जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता” के अधिकार में सम्मानजनक आश्रय यानी shelter का अधिकार भी शामिल माना गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में बुलडोजर कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि केवल किसी व्यक्ति के आरोपी या दोषी होने के आधार पर उसका घर नहीं तोड़ा जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई “पूरी तरह असंवैधानिक” हो सकती है यदि कानूनी प्रक्रिया का पालन न किया जाए। 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी आरोपी को अपराधी मानकर स्वयं सजा नहीं दे सकता। दोष तय करना न्यायपालिका का काम है, न कि कार्यपालिका का। अदालत के अनुसार, बिना उचित प्रक्रिया के घर तोड़ना “collective punishment” यानी पूरे परिवार को सजा देने जैसा हो सकता है। 

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अवैध निर्माण, अतिक्रमण या बिना अनुमति बने ढांचे को कानून के अनुसार हटाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए नोटिस देना, सुनवाई का अवसर देना और संबंधित नगर नियोजन या अतिक्रमण कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। 

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई निर्माण वास्तव में अवैध है तो नगर निगम, विकास प्राधिकरण या प्रशासन कार्रवाई कर सकते हैं। लेकिन कार्रवाई केवल इसलिए नहीं हो सकती कि घर का मालिक किसी आपराधिक मामले में आरोपी है। प्रशासन को यह साबित करना होता है कि निर्माण ने संबंधित भवन नियमों या भूमि कानूनों का उल्लंघन किया है। 

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सुनवाई के दौरान कहा था कि “किसी आरोपी का घर सिर्फ आरोप के आधार पर नहीं गिराया जा सकता, यहां तक कि दोषसिद्ध व्यक्ति के मामले में भी कानून की प्रक्रिया जरूरी है।” अदालत ने पूरे देश के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की बात भी कही थी। 

वहीं दूसरी ओर, कुछ राज्यों का कहना रहा है कि जिन इमारतों पर कार्रवाई की गई वे पहले से ही अवैध निर्माण या अतिक्रमण की श्रेणी में थीं। सरकारों का तर्क है कि कार्रवाई नगर नियोजन और विकास कानूनों के तहत की गई। 

कानूनी और सामाजिक हलकों में यह बहस अभी भी जारी है कि बुलडोजर कार्रवाई कानून लागू करने का तरीका है या फिर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कार्रवाई में due process यानी उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन सबसे महत्वपूर्ण है।

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