डॉ. हर्षवर्धन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुन लिया गया

डॉ. हर्षवर्धन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुन लिया गया

दिल्ली : केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुन लिया गया है. शुक्रवार को वर्चुअल रूप से हुई 147 वीं कार्यकारी बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष चुना गया. डॉ. हर्षवर्धन ने शुक्रवार को अध्यक्ष का पद संभाल लिया.

उन्होंने जापान की डॉ. हिरोकी नकातानी की जगह ली है. 18-19 मई को 73वें विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक में भारत को 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड में शामिल किया गया था. तभी से डॉ. हर्षवर्धन की दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी.

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शुक्रवार को कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष पद संभालते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने सम्मान के लिए सभी का आभार जताया. इस मौके पर उन्होंने सभी सदस्य देशों के साथ कोरोना की जंग लड़ रहे फ्रंट लाइन वॉरियर, स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया.

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सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना बीमारी मानव त्रासदी है और अगले दो दशकों में ऐसी कई चुनौतियां देखने को मिल सकती हैं. उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा प्रयास की जरुरत है. महामारी ने स्वास्थ्य प्रणालियों की कमियों और तैयारियों की अनदेखी के परिणामों से अवगत कराया है. वैश्विक संकट के समय में जोखिम प्रबंधन और इससे निपटने के उपायों को साझा करने और इस साझेदारी को और मजबूत बनाने की आवश्यकता होगी.

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भारत कोरोना संक्रमण से निपटने में रहा सफल

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भारत में कोरोना से निपटने के उपायों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में 135 करोड़ जनसंख्या में एक लाख से ज्यादा कोरोना के मामले हैं और इससे हुई मौत 3 प्रतिशत है. जबकि इससे ठीक होने का प्रतिशत 41 प्रतिशत है और मामले के दोगुने होने में 13 दिन लग रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत ने समय पर कोरोना से निपटने के लिए कदम उठाए और इस बीमारी की रफ्तार को रोकने में कामयाब हुए. उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा संगठन के सदस्य देश और स्टेकहोल्डर निरंतर सभी के हितों को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों को मजबूत करेंगे और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सतत विकास में तेजी लाने में सहयोग करेंगे.

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि डब्ल्यूएचओ इस सिद्धांत में विश्वास करता है कि अच्छा स्वास्थ्य की प्राप्ति हर इंसान के मौलिक अधिकारों में से एक है, जो हर किसी को बिना किसी को बिना भेदभाव मिलना चाहिए. फिर चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, राजनीतिक विश्वास, आर्थिक या सामाजिक स्थिति से ताल्लुक रखता हो. इसलिए सभी सदस्य देशों को साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए.

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