मुंबई में ड्रग तस्करी का नया चेहरा, टेक्नोलॉजी और गुप्त नेटवर्क के सहारे चल रहा कारोबार

A new face of drug trafficking in Mumbai, the business is running on the back of technology and secret networks.

मुंबई में ड्रग तस्करी का नया चेहरा, टेक्नोलॉजी और गुप्त नेटवर्क के सहारे चल रहा कारोबार

मुंबई में ड्रग तस्करी के नेटवर्क अब पहले से अधिक संगठित और तकनीक आधारित हो गए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, सिंडिकेट "नो फेस-नो नेम" मॉडल पर काम कर रहे हैं, जहां सप्लायर, कुरियर और पेडलर एक-दूसरे की पहचान तक नहीं जानते। #MumbaiNews #DrugMafia #MumbaiCrime #DrugTrafficking #MaharashtraNews #BreakingNews #MumbaiPolice

मुंबई में ड्रग तस्करी के नेटवर्क पहले से अधिक संगठित, तकनीक आधारित और जटिल होते जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आधुनिक ड्रग सिंडिकेट अब "नो फेस-नो नेम" मॉडल पर काम कर रहे हैं, जिसमें सप्लायर, कुरियर, स्टॉकिस्ट और पेडलर एक-दूसरे की पहचान तक नहीं जानते।

अधिकारियों का कहना है कि पुराने समय की गैंग आधारित संरचना की जगह अब बहु-स्तरीय नेटवर्क ने ले ली है। इस व्यवस्था में हर व्यक्ति को केवल अपनी भूमिका की जानकारी होती है। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए नाम या फोन नंबर की बजाय कपड़ों के रंग, बैग, वाहन, शारीरिक पहचान और कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जाता है।

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जांच में सामने आया है कि कई नेटवर्क सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, गेमिंग प्लेटफॉर्म और वर्चुअल नंबरों का उपयोग कर रहे हैं। लेन-देन के बाद चैट डिलीट कर दी जाती है और अस्थायी फोन नंबर तुरंत बंद कर दिए जाते हैं, जिससे पुलिस के लिए नेटवर्क तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।

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एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के मुताबिक, वर्तमान मॉडल में यदि किसी पेडलर को गिरफ्तार भी कर लिया जाए तो उसकी जगह तुरंत नया व्यक्ति सक्रिय कर दिया जाता है। इससे नेटवर्क का संचालन प्रभावित नहीं होता और अवैध कारोबार लगातार चलता रहता है।

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जांच एजेंसियों का मानना है कि कई सक्रिय सिंडिकेट विदेशों से संचालित किए जा रहे हैं। दुबई, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में बैठे संचालक एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, फर्जी डिजिटल पहचान, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करते हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई की विशाल आबादी, नाइटलाइफ, कॉर्पोरेट सेक्टर और युवाओं की बड़ी संख्या इसे ड्रग तस्करों के लिए आकर्षक बाजार बनाती है। लोकल ट्रेन, टैक्सी नेटवर्क, डिलीवरी सेवाएं और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल छोटी खेपों की आवाजाही के लिए किया जा रहा है।

पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि केवल छोटे पेडलरों की गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए वित्तीय नेटवर्क, हवाला चैनलों, फर्जी दस्तावेजों, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और विदेशों में बैठे संचालकों पर कार्रवाई जरूरी है।