मुंबई : अधर में महत्वाकांक्षी शक्तिपीठ महामार्ग प्रोजेक्ट; लोगों के इस आक्रामक रुख के कारण प्रशासन के सामने बड़ी मुश्किल
Mumbai: The ambitious Shaktipeeth Highway project is in limbo; the administration is facing a major challenge due to the aggressive public stance.
महाराष्ट्र सरकार के महत्वाकांक्षी शक्तिपीठ महामार्ग प्रोजेक्ट अधर में लटकता नजर आ रहा है। इसे लेकर क्षेत्र में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। परभणी में हुई एक बैठक के दौरान प्रभावित होने वाले लोगों ने सीधे राजस्व मंत्री के सामने दो टूक शब्दों में कह दिया कि करोड़ों का मुआवजा भी दे दो, तब भी हम अपनी जमीन का एक इंच नहीं देंगे।
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार के महत्वाकांक्षी शक्तिपीठ महामार्ग प्रोजेक्ट अधर में लटकता नजर आ रहा है। इसे लेकर क्षेत्र में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। परभणी में हुई एक बैठक के दौरान प्रभावित होने वाले लोगों ने सीधे राजस्व मंत्री के सामने दो टूक शब्दों में कह दिया कि करोड़ों का मुआवजा भी दे दो, तब भी हम अपनी जमीन का एक इंच नहीं देंगे। लोगों के इस आक्रामक रुख के कारण सरकार और प्रशासन के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सीएम फडणवीस के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को कहीं ग्रहण तो नहीं लग गया?
दरअसल, मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना माने जा रहे शक्तिपीठ महामार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर क्षेत्र के कई जिलों में तीखा विरोध चल रहा है। परभणी, लातूर और नांदेड़ में किसानों ने पहले ही सड़कों पर उतरकर सर्वे और मापन की प्रक्रिया रुकवा दी थी। विरोध बढ़ने के बाद सरकार को अस्थायी तौर पर जमीन मापने की प्रक्रिया रोकनी पड़ी। इसी विवाद को सुलझाने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में परभणी के सांसद , राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक, प्रभावित किसान और संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद थे। लेकिन बैठक में समाधान निकलने के बजाय माहौल और गरम हो गया।
उपजाऊ भूमि छीनना चाहती है सरकार
किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने समृद्धि महामार्ग की स्थिति देखी है और वे अपनी उपजाऊ जमीन किसी भी हालत में नहीं देंगे। उनका कहना था कि गांवों में बुनियादी सड़कों की हालत खराब है, लेकिन सरकार किसानों की उपजाऊ जमीन छीनकर नया महामार्ग बनाने पर तुली हुई है। किसानों ने सवाल उठाया कि अगर उनकी जमीन ही चली गई तो वे अपने परिवार का गुजारा वैâसे करेंगे?


