मुंबई : ससून डॉक के आधुनिकीकरण के लिए महाराष्ट्र सरकार का फिनलैंड की कंपनियों से समझौता
Mumbai: Maharashtra government signs MoU with Finnish companies for modernisation of Sassoon Dock
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के ऐतिहासिक ससून डॉक को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल मछली पकड़ने के बंदरगाह के रूप में विकसित करने के लिए फिनलैंड की तीन कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता महाराष्ट्र फिशरीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा किया गया है। इस पहल का उद्देश्य बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना, कचरा प्रबंधन में सुधार करना और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर मछली उद्योग की कार्यक्षमता बढ़ाना है।
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के ऐतिहासिक ससून डॉक को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल मछली पकड़ने के बंदरगाह के रूप में विकसित करने के लिए फिनलैंड की तीन कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता महाराष्ट्र फिशरीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा किया गया है। इस पहल का उद्देश्य बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना, कचरा प्रबंधन में सुधार करना और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर मछली उद्योग की कार्यक्षमता बढ़ाना है।
फिनलैंड की कंपनियों के साथ साझेदारी
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में फिनलैंड की कंपनियों हेलवार, मिरासिस और रिवर रीसायकल के साथ यह एमओयू साइन किया गया। इस सहयोग के तहत ससून डॉक में उन्नत तकनीक और टिकाऊ प्रबंधन प्रणालियों को लागू किया जाएगा।
इस परियोजना में प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण, समुद्र में इस्तेमाल होने वाले जालों के प्रबंधन और आधुनिक नेट-मरम्मत प्रणालियों को लागू करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही मछुआरों और डॉक पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे नई तकनीकों को आसानी से अपनाकर अपनी कार्यक्षमता बढ़ा सकें।
ससून डॉक का महत्व
ससून डॉक भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण मत्स्य बंदरगाहों में से एक है और यह महाराष्ट्र की मत्स्य अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। राज्य के मत्स्य मंत्री नितेश राणे के अनुसार इस बंदरगाह पर लगभग 1,560 पंजीकृत यांत्रिक मछली पकड़ने वाली नौकाएं संचालित होती हैं। यहां हर वर्ष औसतन 50,000 से 60,000 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया जाता है। यह बंदरगाह मुंबई के समुद्री खाद्य व्यापार से जुड़े हजारों मछुआरों, व्यापारियों और श्रमिकों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है।


