मुंबई : ७२ वर्षीय बुजुर्ग के साथ ५२ करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में सनसनीखेज खुलासा
Mumbai: Sensational revelations in the Rs 52 crore cyber fraud case involving a 72-year-old man.
मुंबई में ७२ वर्षीय बुजुर्ग के साथ ५२ करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपियों ने ५२ करोड़ रुपए की बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए चीन, इंडोनेशिया और हांगकांग में तकरीबन १० हजार फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। बता दें कि महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने ५८ करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में २,५०० पेज की चार्जशीट फाइल की है, जिसमें ३२ गिरफ्तार लोगों और ४१ वॉन्टेड आरोपियों के नाम हैं।
मुंबई : मुंबई में ७२ वर्षीय बुजुर्ग के साथ ५२ करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपियों ने ५२ करोड़ रुपए की बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए चीन, इंडोनेशिया और हांगकांग में तकरीबन १० हजार फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। बता दें कि महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने ५८ करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में २,५०० पेज की चार्जशीट फाइल की है, जिसमें ३२ गिरफ्तार लोगों और ४१ वॉन्टेड आरोपियों के नाम हैं। स्कैम में अहम भूमिका निभाने वाले और फरार कुछ आरोपियों जैसे अजमेर के विजय खन्ना और देवेंद्र सैनी के बारे में जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की गई है।
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, इस मामले में चीन, इंडोनेशिया और हांगकांग से जुड़े १०,००० से ज्यादा बैंक अकाउंट इस्तेमाल किए गए थे। इन अकाउंट का इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल्स ने ५८ करोड़ रुपए बॉर्डर पार भेजने के लिए किया था। पैसे को क्रिप्टो करेंसी में भी बदला गया और डिजिटल वॉलेट के जरिए विदेश भेजा गया।
फर्मों के नाम से करंट अकाउंट
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग फर्मों के नाम पर करंट बैंक अकाउंट भी खोले थे, जिनका इस्तेमाल इस स्कैम में किया गया। यह स्कैम अगस्त २०२५ में शुरू हुआ था, जब मुंबई के एक ७२ वर्षीय बुजुर्ग को धोखेबाजों ने फंसाया, जिन्होंने खुद को पुलिस अधिकारी बताया था।
यह है मामला
सीनियर सिटीजन से सबसे पहले एक आदमी ने कॉन्टैक्ट किया, जो खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का ऑफिसर बता रहा था। उसने आरोप लगाया कि उसके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल गैर-कानूनी मैसेज भेजने के लिए किया जा रहा है। फिर कॉल दूसरे धोखेबाज को ट्रांसफर कर दी गई जो मुंबई क्राइम ब्रांच का ऑफिसर बनकर आया था, जिसने दावा किया कि पीड़ित के बैंक अकाउंट मनी-लॉन्ड्रिंग एक्टिविटीज से जुड़े हैं। उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया है और अगर उसने सहयोग नहीं किया तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। यह कहकर डराया था। आरोपियों ने वीडियो कॉल पर कोर्ट कार्रवाई की बात की थी, जिससे डरकर पीड़ित ने ४० दिनों में ५८ करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कर दी थी।


