मुंबई : कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड पर हाई कोर्ट सख्त, बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निगरानी के आदेश
Mumbai: High Court takes strict action on Kanjurmarg dumping ground, orders Brihanmumbai Municipal Corporation to monitor it
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से फैल रहे प्रदूषण और तेज बदबू को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निर्देश दिया है कि वह साइट से निकलने वाली मीथेन गैस और अन्य उत्सर्जनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे और इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करे। यह मामला मुंबई के पूर्वी उपनगरों में रहने वाले लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता से जुड़ा हुआ बताया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह का प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से फैल रहे प्रदूषण और तेज बदबू को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निर्देश दिया है कि वह साइट से निकलने वाली मीथेन गैस और अन्य उत्सर्जनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे और इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करे। यह मामला मुंबई के पूर्वी उपनगरों में रहने वाले लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता से जुड़ा हुआ बताया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह का प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दो प्रमुख समस्याओं को तुरंत ध्यान देने योग्य बताया। पहली समस्या रात 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच फैलने वाली तेज बदबू है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी हो रही है। दूसरी चिंता मीथेन गैस के उत्सर्जन को लेकर जताई गई, जिसे लेकर एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन का भी हवाला दिया गया। अदालत में यह भी उल्लेख किया गया कि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स की एक प्रकाशित स्टडी में लैंडफिल साइट्स से निकलने वाली मीथेन गैस और उसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है। इसी आधार पर कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका से कहा कि वह वैज्ञानिक तरीके से गैस उत्सर्जन की निगरानी करे और डेटा नियमित रूप से रिकॉर्ड करे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कचरा डंपिंग साइट्स से निकलने वाला प्रदूषण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। इसलिए नगर निकाय को इस पर गंभीर और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निर्देश दिया गया है कि वह आधुनिक तकनीक का उपयोग कर मीथेन और अन्य गैसों की निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रदूषण स्तर निर्धारित सीमा से अधिक न हो। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।
इस मामले ने एक बार फिर मुंबई में ठोस कचरा प्रबंधन और डंपिंग ग्राउंड की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से कांजुरमार्ग क्षेत्र में बदबू और प्रदूषण को लेकर शिकायत कर रहे थे, जिसके बाद यह मामला अदालत तक पहुंचा। कोर्ट की सख्ती के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका इस दिशा में तेज कार्रवाई करेगा और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत मिल सकेगी।


