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Read More... दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की खामियों पर NHAI ड्रोन से रखेगा नजर, ब्लैक स्पॉट्स की भी होगी पहचान
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By Online Desk
डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू हो रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक्सेस-कंट्रोल लिंक पर स्वतंत्र इंजीनियर की तैनाती की जा रही है। एक्सप्रेसवे की निगरानी सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान से भी की जाएगी। डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू हो रहे दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के एक्सेस-कंट्रोल लिंक पर स्वतंत्र इंजीनियर की तैनाती की जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने करीब 50 किलोमीटर हिस्से के संचालन और रखरखाव के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत साल में कम से कम दो बार ड्रोन सर्वे अनिवार्य होगा, ताकि सड़क, पुल-फ्लाईओवर और यातायात व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर नजर रखी जा सके। मुंबई : चुनावी प्रक्रिया में शामिल वाहनों की सख्त निगरानी के लिए पहली बार जियो-फेंसिंग सिस्टम का इस्तेमाल
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बीएमसी चुनाव में पहली बार प्रशासन एक नई तकनीकी का उपयोग करने जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया में शामिल वाहनों की सख्त निगरानी के लिए पहली बार जियो-फेंसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रणाली के जरिए चुनाव कार्य में लगे कुल 2,865 वाहनों की गतिविधियों पर पल-पल नजर रखी जाएगी। बीएमसी आयुक्त भूषण गगराणी के निर्देश पर चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। मुंबई: 'स्वच्छ मॉनिटर' के ठेकेदार रोहित आर्य को 2 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं मिला था
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पवई बंधक कांड के आरोपी रोहित आर्य की मौत के बाद नई जानकारी सामने आई है। रोहित शिक्षा विभाग से जुड़े एक प्रोजेक्ट 'स्वच्छ मॉनिटर' के ठेकेदार थे। आरोप है कि उन्हें इस प्रोजेक्ट के करीब 2 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं मिला था, जिसके चलते उन्होंने कथित तौर पर बच्चों को बंधक बनाया था। पुलिस की गोली का शिकार होकर गुरुवार को उनकी मौत हो गई। रोहित आर्य मूल रूप से नागपुर के रहने वाले थे और वहां एक प्रोफेसर के तौर पर काम करते थे। वर्तमान में वे चेंबूर इलाके में रह रहे थे। निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मलेरिया मरीजों की निगरानी करेगी बीएमसी
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महाराष्ट्र के मलेरिया रोगियों की वार्षिक संख्या का लगभग आधा हिस्सा मुंबई में रहता है; एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, शहर में 93% मामले प्लास्मोडियम विवैक्स, एक प्रोटोजोअल परजीवी के कारण होते हैं, जबकि प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम, एक एककोशिकीय प्रोटोजोआ परजीवी, अन्य 5% मामलों के लिए जिम्मेदार है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अनुमानित 87% मलेरिया के मामले भारत में हैं, केंद्र सरकार ने 2030 तक देश में इस बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। 
