मुंबई : मेयर रितू तावडे को झटका, कोर्ट ने केस से बरी करने से किया इनकार, जानिए पूरा मामला

Mumbai: Mayor Ritu Tawde suffers setback as court refuses to discharge her from the case; find out the full story.

मुंबई : मेयर रितू तावडे को झटका, कोर्ट ने केस से बरी करने से किया इनकार, जानिए पूरा मामला

बीएमसी की नई मेयर और बीजेपी नगरसेवक रितु तावडे को मुंबई की कोर्ट से झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने 2 टीचरों पर हमले के आरोपों का सामना कर रही तावडे को आपराधिक केस से बरी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि विक्टिम और गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। मामले से जुड़ा विवाद टीचर के ट्रांसफर को लेकर पैदा हुआ था। झगड़े के दौरान तावडे ने टीचरों के साथ मारपीट की थी।

मुंबई : बीएमसी की नई मेयर और बीजेपी नगरसेवक रितु तावडे को मुंबई की कोर्ट से झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने 2 टीचरों पर हमले के आरोपों का सामना कर रही तावडे को आपराधिक केस से बरी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि विक्टिम और गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। मामले से जुड़ा विवाद टीचर के ट्रांसफर को लेकर पैदा हुआ था। झगड़े के दौरान तावडे ने टीचरों के साथ मारपीट की थी।

 

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टीचर ट्रांसफर का विवाद
यह घटना 29 जुलाई 2016 को वाकोला स्थित उर्दू मीडियम स्कूल में हुई थी। मामले से जुड़ा विवाद टीचर के ट्रांसफर को लेकर पैदा हुआ था। झगड़े के दौरान तावडे ने टोचरों के साथ मारपीट की थी। अडिशनल सेशन जज वाईपी मंथाका ने केस के तथ्यों के मद्देनजर तावडे को राहत देने से इनकार कर दिया।

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दो टीचर्स को थप्पड़ मारने का आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कैंसर से जूझ रही महिला के तबादले के चलते तनावपूर्ण स्थित पैदा हुई थी। इस बीच तावडे की 6 लोगों के साध स्कूल प्रबंधन के साथ पहले तीखी बहस हुई थी। इस दौरान कथित रूप से तावडे ने 2 टीचर के साथ असभ्य भाषा में बात की थी और उन्हें थप्पड़ मारा था।

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13 दिन बाद ऋतु तावडे पर हुई थी एफआईआर
घटना के 13 दिन बाद केस को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं, केस से बरी करने के आवेदन में रितू तावडे ने दावा किया था कि उनका इस मामले से संबंध नही था। उन पर लगे आरोप अस्पष्ट थे। घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति संयोगवश थी। स्कूल ने प्रचार पाने के लिए उनके खिलाफ शिकायत की थी। उन्हें झूठे केस में फंसाने का प्रयास किया गया था।

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सरकारी वकील ने किया था आवेदन का विरोध
सरकारी चकील ने आवेदन का विरोध किया। उन्होंने कहा, इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। स्कूल वह स्थान होता है, जहां स्टूडेंट को सीख मिलती है। इस लिहाज से आरोपी के आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इन दलीलों के मह्देनजर जज ने कहा, केस के विक्टिम ने आरोपी का नाम लिया है। आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए गवाह के बयान पर्याप्त है। यह टिप्पणी कर जज ने आरोपी को केस से आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया।