पुणे में 100+ इलाकों में दूषित जल संकट... मनपा पर सवाल, जनता में आक्रोश
Contaminated water crisis in 100+ areas in Pune... questions on Municipal Corporation, public anger
मलनिस्सारण विभाग के तहत आने वाले जोन क्रमांक 1 से 5 में सीवर लाइनों के जाम होने के कारण मलजल पेयजल की पाइपलाइनों में रिस रहा है। घनी बस्तियों में जल वितरण और निकासी की व्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि दोनों पाइपलाइने एक-दूसरे के बेहद करीब या एक ही स्तर पर बिछी हुई हैं। ऐसे में पाइपलाइन फटने या रिसाव होने की स्थिति में सीवेज सीधे पीने के पानी में मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए जलापूर्ति और ड्रेनेज विभाग के कार्यों हेतु 20 करोड़ 20 लाख रुपये का फंड ट्रांसफर किया गया है, लेकिन धरातल पर सुधार की गति कछुआ चाल से भी धीमी है। पिछले चार वर्षों से पुणे मनपा में प्रशासक राज लागू होने के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।
पुणे : पुणे महानगर पालिका चुनाव के समय ‘साफ पानी’ का झुनझुना थमाने वाले नेताओं के दावे आज नलों से आ रही सीवेज की दुर्गंध में दम तोड़ रहे हैं। चुनावों के समय जिन राजनीतिक दलों ने घर-घर जाकर ‘शुद्ध जल’ का अमृत पिलाने का दावा किया था, आज उनके वादे मनपा की ड्रेनेज लाइनों में बहते नजर आ रहे हैं। शिकायत के बाद जलापूर्ति विभाग ‘मरम्मत’ का घिसा-पिटा बहाना बना रहा है।
बता दें कि सांस्कृतिक राजधानी और शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले पुणे शहर में इन दिनों स्वास्थ्य का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले दो महीने से शहर के 100 से अधिक इलाकों में दुषित पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि नलों से आने वाले पानी में सीवेज की दुर्गंध और गंदगी साफ देखी जा सकती है। के कई यनी आबादी वाले क्षेत्रों में गंदे पानी की सप्लाई बदस्तूर जारी है, जिससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रशासनिक रिपोटों के अनुसार, मलनिस्सारण विभाग के तहत आने वाले जोन क्रमांक 1 से 5 में सीवर लाइनों के जाम होने के कारण मलजल पेयजल की पाइपलाइनों में रिस रहा है। घनी बस्तियों में जल वितरण और निकासी की व्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि दोनों पाइपलाइने एक-दूसरे के बेहद करीब या एक ही स्तर पर बिछी हुई हैं। ऐसे में पाइपलाइन फटने या रिसाव होने की स्थिति में सीवेज सीधे पीने के पानी में मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए जलापूर्ति और ड्रेनेज विभाग के कार्यों हेतु 20 करोड़ 20 लाख रुपये का फंड ट्रांसफर किया गया है, लेकिन धरातल पर सुधार की गति कछुआ चाल से भी धीमी है। पिछले चार वर्षों से पुणे मनपा में प्रशासक राज लागू होने के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।
अब जब नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि वापस आए हैं, तो जनरल बॉडी की बैठकों में नगरसेवकों ने इस मुद्दे पर प्रशासन को जमकर घेरा, नगरसेविका वैशाली बनकर ने सासवड रोड क्षेत्र की भयावह स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि वहां पाइपलाइन से सीधा सीवेज का पानी घरों में पहुंच रहा है। इसी तरह येरवडा से नगरसेविका अश्विनी लांडगे और वानवडी-कोंढवा क्षेत्र से नगरसेवक प्रशांत जगताप ने भी दूषित जलापूर्ति के कारण फैल रही बीमारियों का मुद्दा उठाया। नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। है। सर्वे के साथ-साथ दुरुस्ती कार्य जारी रखकर पेयजल में मिलावट की घटनाएं पूरी तरह रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
महापौर मंजुषा नागपुरे ने प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय में तत्काल बैठक करने के निर्देश दिए है। जलापूर्ति विभाग के मुख्य अभियंता ने भरोसा दिलाया है कि कोंढवा, मोहम्मदवाडी और हडपसर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तात्कालिक कार्य शुरू किए जाएंगे, हालांकि, हकीकत यह है कि मनपा ने जिन 98 स्थानों पर मरम्मत का प्रस्ताव रखा है, उनमें से केवल 50-55 जगहों पर ही काम शुरू हो पाया है।
इंदौर और गुजरात के कुछ शहरों में दूषित पानी से हुई मौतों ने पुणे प्रशासन की नींद तो उड़ाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर सक्रियता अब भी कम है। कोढवा, शिवनेरी नगर, हडपसर, कात्रज के संतोषनगर और अंजनी नगर में लोग पेट दर्द, डायरिया और टायफाइड जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अगर पुरानी पाइपलाइनों को नहीं बदला गया, तो पुणे में जलजनित महामारी फैल जाएगी।


