मुंबई में मोटर बस सेवा के 100 साल पूरे, पुराने डबल डेकर बसों पर विवाद तेज; हटाने की मांग

Mumbai celebrates 100 years of motor bus service; controversy rages over old double-decker buses; calls for their removal

मुंबई में मोटर बस सेवा के 100 साल पूरे, पुराने डबल डेकर बसों पर विवाद तेज; हटाने की मांग

मुंबई में इस साल मोटर बस सेवा के 100 साल पूरे हो रहे हैं। एक ओर बस प्रेमी पुरानी नॉन-एसी डबल डेकर बसों को विरासत के तौर पर बचाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नागपाड़ा और जेजे फ्लाईओवर के आसपास रहने वाले लोग इन बसों को तुरंत हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये बसें अब उपयोग में नहीं हैं और इलाके में परेशानी का कारण बन रही हैं। ये तीन पुरानी डबल डेकर बसें जेजे फ्लाईओवर के नीचे खड़ी हैं। पहली बस साउथ मुंबई की तरफ से आते हुए पायधोनी जंक्शन पर 'कैफेटेरिया' के नाम से खड़ी है। दूसरी बस मिनारा मस्जिद के पास 'लाइब्रेरी' के रूप में और तीसरी बस जेजे जंक्शन के पास 'आर्ट गैलरी' के रूप में रखी गई है। ये बसें मारोल डिपो की थीं और 15 साल की सेवा पूरी करने के बाद इन्हें सार्वजनिक सेवा से हटा दिया गया था।

मुंबई : मुंबई में इस साल मोटर बस सेवा के 100 साल पूरे हो रहे हैं। एक ओर बस प्रेमी पुरानी नॉन-एसी डबल डेकर बसों को विरासत के तौर पर बचाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नागपाड़ा और जेजे फ्लाईओवर के आसपास रहने वाले लोग इन बसों को तुरंत हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये बसें अब उपयोग में नहीं हैं और इलाके में परेशानी का कारण बन रही हैं। ये तीन पुरानी डबल डेकर बसें जेजे फ्लाईओवर के नीचे खड़ी हैं। पहली बस साउथ मुंबई की तरफ से आते हुए पायधोनी जंक्शन पर 'कैफेटेरिया' के नाम से खड़ी है। दूसरी बस मिनारा मस्जिद के पास 'लाइब्रेरी' के रूप में और तीसरी बस जेजे जंक्शन के पास 'आर्ट गैलरी' के रूप में रखी गई है। ये बसें मारोल डिपो की थीं और 15 साल की सेवा पूरी करने के बाद इन्हें सार्वजनिक सेवा से हटा दिया गया था।


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कितना खर्च हुआ?
2021 में सौंदर्यीकरण अभियान के तहत इन तीन बसों को कैफेटेरिया, लाइब्रेरी और आर्ट गैलरी में बदलने के लिए टेंडर निकाला गया था। इन बसों को तैयार करने पर कुल ₹69.23 लाख खर्च किए गए। ये बसें बीएमसी के 'बी वार्ड' क्षेत्र में रखी गई हैं, जिसमें कालबादेवी, मस्जिद बंदर और भेंडी बाजार इलाके शामिल हैं।

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अभी क्या हालत है?
फिलहाल ये तीनों बसें बंद पड़ी हैं। उन पर धूल और गंदगी जमी है। न तो इनमें कैफेटेरिया चल रहा है, न लाइब्रेरी और न ही आर्ट गैलरी। कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ भी हुई है और ये आम लोगों के लिए बंद हैं। बस प्रेमी शुभम पाडवे का कहना है कि इन बसों की हालत खराब कर दी गई है। उनका आरोप है कि बसों को गलत रंग से रंग दिया गया, जो मुंबई की बसों से अलग दिखता है। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी इन बसों की देखभाल नहीं कर सकते, तो वे इन्हें खरीदकर निजी संग्रह में रखने को तैयार हैं। उन्होंने साउथ मुंबई में इन्हें टूरिस्ट सर्किट पर चलाने का प्रस्ताव भी दिया है।

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स्थानीय लोगों की नाराजगी
मोहम्मद अली रोड के रुहान शेख का कहना है कि पहले ये नई चीज़ लगी, लेकिन अब सड़क के बीच लाल दीवार जैसी लगती है। यहां पहले ही पार्किंग की समस्या है। यूसुफ खातिब का कहना है कि सड़क पार करने में दिक्कत होती है क्योंकि बसों के कारण रास्ता रुकता है। नागपाड़ा के रंगराज खातू ने कहा कि वे पुरानी बसों का सम्मान करते हैं, लेकिन फ्लाईओवर के नीचे लाइब्रेरी या कैफे का विचार काम नहीं करता। व्यापारी आत्माराम घोलप ने कहा कि अगर इन्हें किसी खुले संग्रहालय में रखा जाए तो ठीक है, लेकिन यहां ये ट्रैफिक और आपातकालीन वाहनों के लिए रुकावट बन रही हैं।

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100 साल पूरे होने का मौका
मुंबई में मोटर बस सेवा शुरू करने का फैसला जुलाई 1926 में लिया गया था। इस साल जुलाई में उसके 100 साल पूरे हो रहे हैं। उस समय शहर में इलेक्ट्रिक ट्राम से बसों की ओर बड़ा बदलाव हुआ था। हालांकि यह साफ नहीं है कि BEST इस मौके को आधिकारिक तौर पर मनाएगा या नहीं, लेकिन शहर के बस प्रेमी इसे बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी कर रहे हैं।