धनशोधन के मामले में मुंबई के पूर्व आयुक्त संजय पांडे ईडी के समक्ष लगातार दूसरे दिन हुए पेश...
Former Mumbai commissioner Sanjay Pandey appeared before ED for the second consecutive day in money laundering case.
नई दिल्ली : मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के कर्मचारियों की कथित फोन टैपिंग से जुड़े धनशोधन के मामले में पूछताछ के लिए मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए.
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी से इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी लगातार दूसरे दिन मंगलवार को पूछताछ कर रही है. अधिकारियों ने बताया कि सोमवार की तरह ही अधिकारी से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की सुरक्षा ऑडिट के लिए उनके द्वारा शुरू की गई एक कंपनी के व्यापार एवं संचालन से जुड़े सवाल किए जाएंगे.
उनका बयान धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया जाएगा. पांडे 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे. मुंबई के पुलिस आयुक्त के रूप में अपने चार महीने के कार्यकाल से पहले, उन्होंने महाराष्ट्र के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं.
वहीं, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को कहा था कि उसने पांडे और मुंबई के एक अन्य पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह से महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की वसूली के आरोप में पूछताछ की.
एनएसई के कर्मचारियों की कथित फोन टैपिंग मामले में सीबीआई और ईडी दोनों ने संजय पांडे के खिलाफ मामला दर्ज किया है. ईडी ने इस महीने की शुरुआत में ‘को-लॉकेशन’ घोटाला मामले में भी उनसे पूछताछ की थी.
सीबीआई और अब ईडी ने पांडे और उनकी दिल्ली स्थित कंपनी आईएसईसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड समेत एनएसई के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नारायण और रामकृष्ण, कार्यकारी उपाध्यक्ष रवि वाराणसी और प्रमुख (परिसर) महेश हल्दीपुर समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
ईडी को एनएसई में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच के दौरान एक फोन मिला था, जिसकी जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी गई। इसके बाद मंत्रालय ने सीबीआई को इन आरोपों की जांच करने को कहा था.
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि नारायण और रामकृष्ण, वाराणसी और हल्दीपुर ने 2009 से 2017 के दौरान गैरकानूनी तरीके से एनएसई के कर्मचारियों के फोन टैप करने की साजिश रची, जिसके लिये उन्होंने पांडे द्वारा 2001 में स्थापित की गई कंपनी आईएसईसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को काम पर रखा था.
आईपीएस अधिकारी ने इस्तीफा देने के बाद कंपनी खोली थी, लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था.सीबीआई ने आरोप लगाया कि कंपनी को कथित तौर पर अवैध टैपिंग के लिए 4.45 करोड़ रुपये मिले थे. एजेंसी ने दावा किया कि कंपनी ने शेयर बाजार के वरिष्ठ प्रबंधन को टैप की गई बातचीत की लिखित प्रति भी मुहैया कराई.


