“RSS कार्यक्रमों में 4 बार शामिल होने का आरोप, केजरीवाल का सवाल—‘क्या उन्हें मिलेगा न्याय?’ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का जवाब सामने आया”

Attending RSS events four times, Kejriwal asks, 'Will he get justice?' Justice Swaran Kanta Sharma's response revealed."

“RSS कार्यक्रमों में 4 बार शामिल होने का आरोप, केजरीवाल का सवाल—‘क्या उन्हें मिलेगा न्याय?’ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का जवाब सामने आया”
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त किए गए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई की।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त किए गए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई की।

Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त किए गए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई की। इसमें अनुरोध किया गया है कि अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को अलग किया जाए। सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अपनी दलील रखी और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर सवाल खड़े कर दिए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, एक संगठन है, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद। उनके इवेंट को योर ऑनर 4 बार अटेंड करके आई थीं। उनकी जो आइडियोलॉजी है, हम उसके सख्त खिलाफ हैं। ये केस पॉलिटिकल है। अगर योर ऑनर किसी एक विचारधारा का प्रोगाम अटेंड कर रही हैं तो मेरे दिमाग में एक आशंका पैदा हो ती है। इस पर जज ने पूछा, क्या शंका कि मैं उस विचारधारा की हूं। इस पर केजरीवाल ने कहा, आपके चार बार जाने से मेरे दिमाग में शंका पैदा होती है कि क्या मुझे इंसाफ मिलेगा।

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जज ने क्या दिया जवाब
इस पर जज ने कहा, आपने अपने आवेदन में प्रोग्राम का लिंक नहीं दिया है। मेरा एक सवाल है कि जब मैं उस कार्यक्रम में गई, तब क्या मैंने क्या कोई आइडियोलॉजिकल या राजनीतिक बयान दिया और क्या ये कोई लीगल प्रोग्राम था।

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केजरीवाल ने अपनी बात रखते हुए कहा, अभी कुछ दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने एक बयान दिया कि हाई कोर्ट से जो आदेश आएगा, उसके खिलाफ केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा। इस पर जज ने पूछा कि कोई क्या कहता है, इस पर मेरा क्या कंट्रोल है? केजरीवाल ने आगे कहा, अभी कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक मुद्दा चल रहा है कि पुराना रिवाज है कि जज के नियर और डियर किसी पार्टी से जुड़े होते थे जो वह जज उस केस से पीछे हट जाते थे।

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बता दें, जज ने 6 अप्रैल को खुद को मामले से अलग करने के आप प्रमुख के आवेदन को रिकॉर्ड में लिया था और इसे 13 अप्रैल की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को मामले से अलग करने का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि इस बात की गंभीर, वास्तविक और उचित आशंका है कि उनके समक्ष मामले की सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी।

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केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक समेत अन्य आप नेताओं ने भी न्यायाधीश को मामले से अलग करने के लिए आवेदन दायर किए हैं। विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई सहित अन्य प्रतिवादियों ने भी इसी तरह के आवेदन दायर किए हैं।

अधीनस्थ अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ।

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