मुंबई में ईडी का बड़ा एक्शन, गोरेगांव पर्ल प्रोजेक्ट से जुड़े 41.70 करोड़ रुपये के संपत्ति अटैच, जानें पूरा मामला
ED takes major action in Mumbai, attaches assets worth Rs 41.70 crore related to Goregaon Pearl project; learn the full story
ई़डी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 मार्च 2026 को पीएमएलए के तहत 41 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को अटैच किया है. यह कार्रवाई मुंबई के गोरेगांव पर्ल प्रोजेक्ट पर की गई है. प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम , 2002 के तहत करीब 41.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ये संपत्तियां मुंबई के गोरेगांव स्थित गोरेगांव पर्ल सीएचएस प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं, जिनमें पूर्ण और आंशिक रूप से निर्मित रिहायशी फ्लैट, कमर्शियल दुकानें और ऑफिस स्पेस शामिल हैं.
मुंबई : ई़डी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 मार्च 2026 को पीएमएलए के तहत 41 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को अटैच किया है. यह कार्रवाई मुंबई के गोरेगांव पर्ल प्रोजेक्ट पर की गई है. प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम , 2002 के तहत करीब 41.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ये संपत्तियां मुंबई के गोरेगांव स्थित गोरेगांव पर्ल सीएचएस प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं, जिनमें पूर्ण और आंशिक रूप से निर्मित रिहायशी फ्लैट, कमर्शियल दुकानें और ऑफिस स्पेस शामिल हैं.
ईडी ने अपनी जांच में और क्या खुलासे किए?
ईडी की जांच में सामने आया कि इन संपत्तियों को मूल रूप से मेसर्स साई सिद्धि डेवलपर्स द्वारा विकसित किया गया था. डेवलपर्स ने इन फ्लैट्स और दुकानों का कुछ हिस्सा बाहरी खरीदारों को बेच दिया और उनसे पूरी या आंशिक रकम भी वसूल ली. लेकिन खरीदारों को न तो फ्लैट/दुकानें दी गईं और न ही उनकी रकम वापस की गई, जिससे वे इस मामले में पीड़ित बन गए.
जांच में यह भी पता चला कि साई सिद्धि डेवलपर्स के प्रमुख पार्टनर जयेश तन्ना ने खरीदारों से धोखाधड़ी कर जो रकम हासिल की, वही इस मामले में अपराध की आय है.
मुंबई पुलिस की तरफ से दर्ज एफआईआर पर हुई ईडी की कार्रवाई
ईडी ने यह जांच मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत साई सिद्धि डेवलपर्स, जयेश तन्ना और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थीं. इन मामलों में मुंबई पुलिस द्वारा चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.
जांच में यह भी सामने आया कि जयेश तन्ना ने गोरेगांव पर्ल रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नाम पर फ्लैट और दुकान खरीदारों से जुटाए गए फंड का दुरुपयोग किया और उसे निजी लाभ के लिए डायवर्ट किया. इसके चलते प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका और खरीदारों को करीब 47.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
ईडी ने 2025 में मुंबई के 9 ठिकानों पर छापेमारी की थी
इससे पहले भी ईडी ने 5 मार्च 2025 को जयेश तन्ना और साई ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े अन्य प्रोजेक्ट्स के मामले में मुंबई के 9 ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस मामले में ईडी ने 35.89 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं, जिनमें यूके में स्थित संपत्ति भी शामिल थी. इस अटैचमेंट को नई दिल्ली स्थित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने पुष्टि भी दी है. फिलहाल इस पूरे मामले में ईडी की जांच जारी है.


