मुंबई में कागजों पर सिमटा प्लास्टिक बैन, धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल; सर्वे में हुआ खुलासा
Plastic ban in Mumbai remains on paper, but rampant use continues; survey reveals
मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।
मुंबई : मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।
सर्वे में क्या सामने आया
एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक द्वारा अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच मुंबई, दिल्ली, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों पर यह सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि कुल 84% जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था।
कहां सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है प्लास्टिक
सर्वे में पाया कि मुंबई में जूस की दुकानों, थोक बाजारों और सड़क किनारे विक्रेताओं के बीच प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है। इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशन, मॉल, पर्यटन स्थल और मेट्रो स्टेशनों पर भी करीब आधे दुकानदार प्लास्टिक बैग ग्राहकों को दे रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर स्थिति और भी गंभीर है, जहां 90% स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग जारी है।
प्लास्टिक क्यों बना हुआ है लोगों की पहली पसंद
टॉक्सिक्स लिंक के निदेशक रवि अग्रवाल के अनुसार, ज्यादातर जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक की मौजूदगी यह दिखाती है कि नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा। जब तक इन उत्पादों की सप्लाई को नियंत्रित नहीं किया जाएगा, तब तक प्लास्टिक कचरे को कम करना मुश्किल होगा। पर्यावरणविद ऋषि अग्रवाल का कहना है कि प्लास्टिक आज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह हल्का, सस्ता और सुविधाजनक है, इसलिए लोग इसे आसानी से छोड़ नहीं पा रहे। क्विक-डिलीवरी और सुविधा की संस्कृति में पर्यावरण अक्सर पीछे छूट जाता है।
स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है असर
सिंगल-यूज प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। यह धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर पानी, मिट्टी और हवा को प्रदूषित करता है, जो अंततः हमारे शरीर में पहुंचता है। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
जुर्माना भी नहीं बन पा रहा डर
मुंबई में सिंगल-यूज के इस्तेमाल पर 5000 रुपये तक का जुर्माना है, लेकिन इसके बावजूद लोग इससे बच नहीं रहे। बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, शहर के 24 वार्डों में रोजाना औसतन एक केस दर्ज किया जाता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। बीएमसी की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनका असर सीमित नजर आ रहा है। खासकर अनौपचारिक क्षेत्र जैसे रेहड़ी-पटरी वालों के बीच नियमों का पालन कराना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।


