पालघर : प्रस्तावित मुरबे मल्टी-कार्गो पोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ लड़ाई

Palghar: The fight against the proposed Murbe multi-cargo port project

पालघर : प्रस्तावित मुरबे मल्टी-कार्गो पोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ लड़ाई

महायुति सरकार द्वारा पालघर तट पर प्रस्तावित मुरबे मल्टी-कार्गो पोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे मछुआरों को आखिरकार सफलता मिलती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जुड़ी विशेषज्ञ मूल्यांकन (ईएसी) समिति के सदस्यों ने हाल ही में आयोजित अपने ४३६वीं बैठक में इस परियोजना की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पालघर : महायुति सरकार द्वारा पालघर तट पर प्रस्तावित मुरबे मल्टी-कार्गो पोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे मछुआरों को आखिरकार सफलता मिलती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जुड़ी विशेषज्ञ मूल्यांकन (ईएसी) समिति के सदस्यों ने हाल ही में आयोजित अपने ४३६वीं बैठक में इस परियोजना की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ८ मार्च २०२६ को पेश अपनी रिपोर्ट में ईएसी ने तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन के विनाशकारी खतरे से सुरक्षा, कोस्टल जोन सुरक्षा (शोरलाइन इरोजन) और स्थानीय मछुआरों की पारंपरिक आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव सहित २० गंभीर त्रुटियों की पहचान कर संबंधित यंत्रणा से अतिरिक्त विवरण मांगा है। यह जानकारी ‘अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति’ प्रणित मुर्बे-जिंदाल पोर्ट विरोधी संघर्ष समिति ने दी।

 

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सूत्रों के अनुसार, फिलहाल इस प्रस्ताव को रोक दिया गया है। अखिल महाराष्ट्र मच्छिमार कृति समिति के अध्यक्ष देवेंद्र दामोदर तांडेल के अनुसार, ईएसी ने परियोजना के प्रमोटर से यह सवाल किया है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में परियोजना के जोखिम का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक मानदंडों का पालन क्यों नहीं किया गया? टंडेल ने कंपनी द्वारा २०१४ के पुराने नक्शों का उपयोग करके संरक्षित मैंग्रोव्ज वनों को कागजों से गायब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब परियोजना का मुख्य आधार यानी सीआरजेड के नक्शे ही खाली और १० वर्ष पुरानी जानकारी पर आधारित हैं, तो जन सुनवाई वैâसे वैध हो सकती है? ये सरासर धोखाधड़ी का मामला है।

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इस संबंध में मछुआरा समिति ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से संपर्क कर सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराई है। मछुआरों की मानें तो कंपनी के पास न तो जल योजना है और न ही बिजली के लिए आधिकारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र। ऐसे में आखिर किसके दबाव में आकर प्रशासनिक तंत्र इस परियोजना को लोगों पर थोपने हेतु आमादा है।

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मछुआरा समिति के पालघर जिला अध्यक्ष विनोद पाटील ने चेतावनी देते हुए कहा कि पालघर जिले के मछुआरे इस भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ गली से लेकर दिल्ली तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे और जब तक यह धोखाधड़ी वाली परियोजना पूरी तरह से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। ज्ञात हो कि प्रस्तावित मुरबे मल्टी-कार्गो पोर्ट वाढ़वन बंदरगाह परियोजना का हिस्सा है, जिसे भारत की एक अग्रणी बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स कंपनी द्वारा ४,२५९ करोड़ की अनुमानित लागत से विकसित किए जाने का सरकार का प्लान है।

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