मुंबई हवाई अड्डे के फ्लाईओवर के नीचे ‘सामुदायिक शहरी फार्म’ विकसित किया जाएगा
A 'community urban farm' will be developed under the Mumbai airport flyover.
मुंबई की उपेक्षित जगहों को फिर से जीवंत बनाने की कोशिशों के तहत बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 के पास स्थित एक फ्लाईओवर के नीचे के क्षेत्र को विशाल “सामुदायिक शहरी फार्म” में तब्दील करने की योजना बनाई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना मुंबई में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे (डब्ल्यूईएच) कॉरिडोर को लेकर संभवत: अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका मकसद 24,000 वर्ग फुट के इलाके को एक हरे-भरे कृषि क्षेत्र में बदलना है, जहां स्थानीय लोग फल, सब्जियां और अन्य पौधे उगा सकें।
मुंबई : मुंबई की उपेक्षित जगहों को फिर से जीवंत बनाने की कोशिशों के तहत बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 के पास स्थित एक फ्लाईओवर के नीचे के क्षेत्र को विशाल “सामुदायिक शहरी फार्म” में तब्दील करने की योजना बनाई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना मुंबई में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे (डब्ल्यूईएच) कॉरिडोर को लेकर संभवत: अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका मकसद 24,000 वर्ग फुट के इलाके को एक हरे-भरे कृषि क्षेत्र में बदलना है, जहां स्थानीय लोग फल, सब्जियां और अन्य पौधे उगा सकें।
अधिकारियों के मुताबिक, छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास टी-1 एक्वा लाइन मेट्रो स्टेशन के बगल में स्थित इस परियोजना का काम अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है।उन्होंने बताया कि परियोजना में बीएमसी की भूमिका जमीन, पानी और बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने तक सीमित है, जबकि बाकी का काम ‘स्वच्छ पार्ले अभियान’ और ‘पार्ले वृक्ष मित्र’ जैसे स्थानीय संगठन संभाल रहे हैं।
बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण या ‘जॉगिंग ट्रैक’ बनाने की पारंपरिक अवधारणा से आगे बढ़ना है। हम शहर में कंक्रीट की इमारतों के बीच एक कार्यात्मक हरित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं।”
‘स्वच्छ पार्ले अभियान’ से जुड़ी वर्षा करांबलेकर ने कहा कि प्रस्तावित योजना के तहत बीएमसी फल-सब्जी उगाने के लिए लगभग 6 फुट x 3 फुट के कई समर्पित क्षेत्र बनाएगी, जिन्हें स्थानीय लोग गोद ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि अन्य उपनगरों के निवासी भी इस परियोजना का हिस्सा बन सकते हैं। करांबलेकर के अनुसार, फल-सब्जी उगाने के लिए अब तक 24 समर्पित क्षेत्र विकसित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि लोगों की भागीदारी और मांग के हिसाब से इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।
करांबलेकर के मुताबिक, परियोजना से जुड़े वाले परिवार अपने-अपने भूखंडों के रखरखाव और फसल की कटाई के लिए जिम्मेदार होंगे, जिससे महानगर के भीतर “खेत से सीधे मेज तक” की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत सभी तरह की फल-सब्जियां उगाई जा सकेंगी। करांबलेकर के अनुसार, इस ‘सामुदायिक शहरी फार्म’ में एक प्रदर्शन क्षेत्र होगा, जहां लोगों को बालकनी में और छत पर बागवानी करने का हुनर सिखाया जाएगा। उन्होंने बताया कि फार्म के एक छोटे से हिस्से में निवासियों को अतिरिक्त उपज बेचने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
करांबलेकर ने बताया कि ‘सामुदायिक शहरी फार्म’ में एक अनोखी ‘पौधशाला’ भी बनाई जाएगी, जहां लोग शहर से बाहर की यात्रा के दौरान अपने घर में लगे पौधों को देखभाल के लिए छोड़ सकेंगे।
उन्होंने कहा कि ‘सामुदायिक शहरी फार्म’ में फल-सब्जी उगाने के लिए शहर में उत्पन्न गीले कचरे से पैदा खाद का इस्तेमाल किए जाने की योजना है।


