कुर्ला स्थित छह खतरनाक इमारतों को गिराने के लिए मनपा द्वारा जारी नोटिस को रोकने से हाईकोर्ट का इंकार 

High Court refuses to stay notice issued by Municipal Corporation to demolish six dangerous buildings in Kurla

कुर्ला स्थित छह खतरनाक इमारतों को गिराने के लिए मनपा द्वारा जारी नोटिस को रोकने से हाईकोर्ट का इंकार 

कुर्ला पश्चिम स्थित छह खतरनाक इमारतों को गिराने के लिए मनपा द्वारा जारी नोटिस को रोकने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया। कोर्ट ने निवासियों की याचिका खारिज करते हुए इमारतों की देखभाल न करने पर रहवासियों को कड़ी फटकार लगाई। बता दें कि साल 2020 में किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में इन इमारतों के बड़े पैमाने पर मरम्मत और आंशिक ध्वस्तीकरण की आवश्यकता बताई गई थी।

मुंबई : कुर्ला पश्चिम स्थित छह खतरनाक इमारतों को गिराने के लिए मनपा द्वारा जारी नोटिस को रोकने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया। कोर्ट ने निवासियों की याचिका खारिज करते हुए इमारतों की देखभाल न करने पर रहवासियों को कड़ी फटकार लगाई। बता दें कि साल 2020 में किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में इन इमारतों के बड़े पैमाने पर मरम्मत और आंशिक ध्वस्तीकरण की आवश्यकता बताई गई थी। सोसायटी ने इस रिपोर्ट की अनदेखी की और समय पर देखभाल नहीं की। जिससे इमारत जर्जर अवस्था में चली गई। मनपा ने इन इमारतों को जर्जर घोषित कर
दिया। उल्लेखनीय है कि राहत अपार्टमेंट्स हाउसिंग सोसायटी की इन छह इमारतों में 88 फ्लैट हैं। मनपा द्वारा 20 मई को की गई जांच में बी-2 विंग की छत गिरने कई जगह प्लास्टर उखड़ने और दीवारों में दरारें पाए जाने की पुष्टि हुई थी।

 

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स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में इमारतों को "जर्जर" बताते हुए तुरंत खाली कराने की सिफारिश की गई। मनपा ने 23 मई को नोटिस जारी कर इमारतें खाली करने और ध्वस्त करने का आदेश दिया। इस नोटिस के खिलाफ सोसायटी के 22 निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे रद्द करने और मनपा के टैग कमेटी को भेजने और पूरी इमारत तोड़ने की बजाय मरम्मत करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट को देखते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मनपा ने पर्याप्त आधार पर कार्रवाई की है और उसे कानूनन इमारत ध्वस्त करने का अधिकार है। वहीं सोसायटी का रवैया असंवेदनशील बताते हुए अदालत ने कहा कि उन्होंने कभी भी इमारत की उचित देखभाल नहीं की, इसलिए निवासियों को राहत नहीं दी जा सकती।

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