नई दिल्ली: सिविल विवादों को आपराधिक मामलों में बदलने की प्रथा गलत- सुप्रीम कोर्ट

New Delhi: The practice of converting civil disputes into criminal cases is wrong- Supreme Court

नई दिल्ली: सिविल विवादों को आपराधिक मामलों में बदलने की प्रथा गलत- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज को केरल हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की है। अब सरकार की मंजूरी का इंतजार है। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में कॉलेजियम की बीते महीने दो बैठकें हुईं और तीसरी बैठक बीती 3 अप्रैल को हुई। इन बैठकों में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को केरल उच्च न्यायालय भेजने की सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर यह जानकारी दी गई है। 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज को केरल हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की है। अब सरकार की मंजूरी का इंतजार है। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में कॉलेजियम की बीते महीने दो बैठकें हुईं और तीसरी बैठक बीती 3 अप्रैल को हुई। इन बैठकों में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को केरल उच्च न्यायालय भेजने की सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर यह जानकारी दी गई है। 

 

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सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश में दीवानी मामले को आपराधिक मामले में बदलने की आलोचना की। मामला नागरिक विवाद से जुड़ा है, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने धोखाधड़ी के तहत दर्ज किया, जो आपराधिक मामला बन गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी और जांच अधिकारी से हलफनामा दायर करने को कहा है, जिसमें उन्हें बताना है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। 

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वक्फ विधेयक के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने की सहमति जताई है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीयत उलमा- ए- हिंद की ओर से पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की याचिकाओं को जल्द सुनने की बात पर सहमति दी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मैं आज दोपहर तक पत्र को देखता हूं फिर निर्णय लूंगा। इस मुद्दे से जुड़ी अन्य याचिकाएं पहले से भी दायर हैं।

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अपनी याचिका में जमीयत उलमा- ए- हिंद ने कहा है कि इस कानून से सीधे हमारे देश की संविधान पर हमला किया जा रहा है। हमारे संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का प्रावधान है। इसके साथ हमें धार्मिक आजादी देने की भी बात कही गई है। जमात ने आगे कहा कि इस विधेयक से मुसलमानों की धार्मिक आजादी छीनने की कोशिश की गई है। हमने वक्फ संशोधन 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। जमात उलमा-ए-हिंद की राज्य इकाइयां भी अपने-अपने राज्यों के उच्च न्यायालयों में इस कानून के खिलाफ चुनौती देंगे।  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को वक्फ संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। यह बिल दोनों सदनों में तीखी बहस के बाद पारित हुआ है। इस बिल के पक्ष में लोकसभा में 288 वोट और राज्यसभा में 128 वोट पड़े हैं।

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